IGNOU BAAHD BHDC 112 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

BHDC 112 Solved Assignment
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BHDC 112: हिंदी निबंध और अन्य गद्य विधाएँ

Title Name IGNOU BAAHD BHDC 112 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BAAHD
Course Name अनुप्रयुक्त हिंदी में स्नातक उपाधि
Subject Code BHDC 112
Subject Name हिंदी निबंध और अन्य गद्य विधाएँ
Year 2025 2026
Session -
Language English Medium
Assignment Code BHDC 112/Assignment-1/2025 2026
Product Description Assignment of BAAHD (अनुप्रयुक्त हिंदी में स्नातक उपाधि) 2025 2026. Latest BHDC 112 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • July 2025 Session: 30th April, 2026
  • January 2026 Session: 31st October, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
Scoring: Designed to help students achieve 90+ marks.
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Included:

BHDC 112 (July 2025 - January 2026) - HINDI

हिंदी निबंध और अन्य गद्य विधाएँ सत्रीय कार्य 2025-26 (संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)

पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.-112/बी.ए.एच.डी.एच. सत्रीय कार्य कोड: बी.एच.डी.सी.-112/2025-26

कुल अंक : 100

खंड-1

निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

अंक :

1. ललित निबंध के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालिए।

2. निम्नलिखित में से किन्हीं दो की सप्रसंग व्याख्या लिखिए :

(क)" राजा हरिश्चंद्र ने अपनी रानी शैव्या से अपने ही मृत पुत्र के कफन का टुकड़ा फड़वा नियम का अद्भुत पालन किया था। पर यह समझ रखना चाहिए कि यदि शैव्या के स्थान पर कोई दूसरी स्त्री होती तो राजा हरिश्चंद्र के उस नियम पालन का उतना महत्व न दिखाई पड़ताय करुणा ही लोगों की श्रद्धा को अपनी ओर अधिक खींचती है। करुणा का विषय दूसरे का दुख हैय अपना दुख नहीं। आत्मीय जनों का दुख एक प्रकार से अपना ही दुख है। इससे राजा हरिश्चंद्र के नियम पालन का जितना स्वार्थ से विरोध था उतना करुणा से नहीं। "

(ख) "हृदय के भीतर जलनेवाली विरहाग्नि ने उसे किसी काम का नहीं छोड़ा। हे भगवान, तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते कि सारे गाँव के समान इस बालिका को भी चंद्रमा उतना ही शीतल लगे जितना औरों को लगता है! अर्थात् विरहिणी की दारूण-व्यथा अब सब के चित्त की सामान्यअनुभूति के साथ ताल मिलाकर चलने लगी। पागल का श्लगनाश् एक का लगना होता है, कवि का लगना सबको लगने लगता है। बात उलट कर कही जाय तो इस प्रकार होगी जिसका लगना सबको लगे वह कवि है, जिसका लगना सिर्फ उसे ही लगे, औरों को नहीं, वह पागल। लगने लगने में भी भेद है। जो सबको लगे, वह अर्थ है, जो एक को ही लगे, वह अनर्थ है। अर्थ सामाजिक होता है।"

(ग) "हाँ, उसके रूखे केश धीरे से कुछ कह गए। कुछ सुना है और अधिकांश अनसुना रह गया। पेट ही पहार है, इन केशों को सँवारने की किसे फुरसत है। यह जलता हुआ जमाना, यह महामारी-सी महँगाई, यह काल-सा अकाल ! जिनके लाल सूखे वक्ष की ठठरियों को चिचोर-चिचोर कर

चिल्लाते हैं, जिनके लिए मनुष्य ही भगवान है, जिनके लिए मुट्ठी भर अन्न ही मोक्ष सुख है उनके लिए क्या केश और क्या श्रृंगार ! क्या अनुराग और क्या सुहाग !"

खंड-2

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 700-800 शब्दों में लिखिए।

3. निबंध की परिभाषा बताते हुए निबंधों के वर्गीकरण पर प्रकाश डालिए।

4. 'करुणा' निबंध का प्रतिपाद्य लिखिए।

5. 'गिल्लू' रेखाचित्र का सारांश लिखिए।

6. 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' निबंध के महत्व पर प्रकाश डालिए।

खंड-3

7. महाकवि जयशंकर प्रसाद 'संस्मरण' के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए

8. 'रजिया' रेखाचित्र का प्रतिपाद्य बताइए।

9.'आम रास्ता नहीं है' का कथासार लिखिए।

 

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