IGNOU BAAHD BHDC 134 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

BHDC 134 Solved Assignment
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BHDC 134: हिंदी गद्य साहित्य

Title Name IGNOU BAAHD BHDC 134 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BAAHD
Course Name अनुप्रयुक्त हिंदी में स्नातक उपाधि
Subject Code BHDC 134
Subject Name हिंदी गद्य साहित्य
Year 2026
Session -
Language English Medium
Assignment Code BHDC 134/Assignment-1/2026
Product Description Assignment of BAAHD (अनुप्रयुक्त हिंदी में स्नातक उपाधि) 2026. Latest BHDC 134 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

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Included:

BHDC 134 2025 - Hindi

हिंदी गद्य साहित्य

(BHDC 134)

सत्रीय कार्य

पाठ्‌यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी-134

सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.की.सीः 134/टीएमए/2025

कुल अंक 100

खंड-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की व्याख्या व्याख्या:

(क) घर आकर मैंने पत्र सीधा बुआ को दे दिया और वह उसको खोलकर तभी पढ़ने में लग गई। खत बड़ा नहीं था। लेकिन कई मिनट तक वह उसे पढ़ती रही। यह भी भूल गई कि प्रमोद भी उनको कोई है और इस वक्त वह पास ही खड़ा है। काफी देर के बाद उन्होंने वहाँ से आँख हटाई, खत को धीमे-धीमे तह किया और मुझको देखा मानो उस वक्त मुझे वह पहचान नहीं रही थीं। मानों सब भूल गई कि कया था, क्या है, क्या होगा। फिर उसी बेबूझ भाव से मुझे देखते रहकर मानो यंत्र की भाँति उस खत को फाड़कर नन्हें-नन्हें टुकड़ों में कर दिया। मानों वह कुछ नहीं कर रहीं, जाने कौन करा रहा है।

(ख) वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया; किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गये कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा-प्रार्थना की चेष्टा नहीं की। वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असहृदय-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनी तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। स‌द्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था, नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर।

2 हिन्दी गद्य की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।

3.आकाशदीप' कहानी के प्रमुख पात्रों का परिचय दीजिए।

4. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।

क) 'नमक का दारोगा' कहानी की भाषा-शैली

ख) त्यागपत्र उपन्यास का सार

खंड-ग

5. 'लोभ और प्रीति' के भाव पक्ष का विवेचन कीजिए। 

6. 'सहस्त्र फणों का मणि-दीप' के कथ्य का विश्लेषण कीजिए। 

7. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।

क) निबंध के तत्व

ख) 'कुटज' की भाषा


BHDC 134 2026 - Hindi

हिंदी गद्य साहित्य

(BHDC 134)

सत्रीय कार्य

पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी-134

सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सीः 134 / टीएमए/2026

कुल अंक 100

खंड-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

(क) पिताजी उनको बड़ा स्नेह करते थे। उनकी सभी इच्छाएँ वह पूरी करते। पिता का यह स्नेह उन्हें बिगाड़ न दे, इस बात का मेरी माता को खासा खयाल रहता था। वह अपने अनुशासन में सावधान थीं। मेरी बुआ को कम प्रेम करती थीं, यह तो किसी हालत में नहीं कहा जा सकता। पर आर्य गृहिणी का जो उनके मन में आदर्श था, मेरी बुआ को वे ठीक उसी के अनुरूप ढालना चाहती थीं।

(ख) नाश्ता कर गजाधर बाबू बैठक में चले गए। घर छोटा था और ऐसी व्यवस्था हो चुकी थी कि उसमें गजाधर बाबू के हरने के लिए कोई स्थान न बचा था। जैसे किसी मेहमान के लिए कुछ अस्थायी प्रबंध कर दिया जाता है, उसी प्रकार बैठक में कुर्सियों को दीवार से सटाकर बीच में गजाधर बाबू के लिए पतली सी चारपाई डाल दी गई थी गजाधर बाबू उस कमरे में पड़े-पड़े, कभी-कभी अनायास ही इस सुस्थायित्व का अनुभव करने लगते। उन्हें याद हो आती उन रेलगाड़ियों की, जो आतीं और थोड़ी देर रुककर किसी और लक्ष्य की ओर चली जातीं।

खंड-ख

2. हिन्दी गद्य के विकास की विवेचना कीजिए।

3. 'त्याग-पत्र' उपन्यास के संरचना और शिल्प पर प्रकाश डालिए।

4. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।

क) नमक का दारोगा कहानी का कथा-सार

ख) 'गजाधर बाबू' की चारित्रिक विशेषताएँ

खंड-ग

5. हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंधों की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

6. 'लोभ और प्रीति' निबंध के विचार पक्ष का विवेचन कीजिए।

7. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200-250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।

क) हिन्दी निबंध साहित्य के विकास में रामचंद्र शुक्ल का योगदान

ख) 'सहस्त्र फणों का मणि-दीप' निबंध का भाव-पक्ष

 

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