IGNOU BAASK BSKC 111 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

BSKC 111 Solved Assignment
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BSKC 111: वैदिक साहित्य

Title Name IGNOU BAASK BSKC 111 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BAASK
Course Name अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि
Subject Code BSKC 111
Subject Name वैदिक साहित्य
Year 2026 2027
Session -
Language English Medium
Assignment Code BSKC 111/Assignment-1/2026 2027
Product Description Assignment of BAASK (अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि) 2026 2027. Latest BSKC 111 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • January 2026 Session: 31st March, 2027
  • July 2026 Session: 30th September, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
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Included:

BSKC 111 2025 2026 - Hindi

सत्रीय कार्य : BSKC-111 वैदिक साहित्य

सत्रीय कार्य - BSKC-111/TMA/2025-26

नोट - इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रन अनिवार्य हैं।

प्रथ - 1 निवलिखित में से किन्हीं दो मचों की व्याख्या कीजिए -

a) उषो वाजेन वाजिनि प्रचेताः स्तोमं जुषस्व घृणतो मघोनि। पुराणि देवी युवतिः पुरंधिरु व्रतं चरसि विश्वारे॥

b) येन कर्मण्यपसो मनिशिनो यज्ञे कृण्वन्ति विदयेषु धीराः। यदपूर्व यक्षमन्तः प्रजानानतन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ॥

c) अणुव्रतः पितुः पुत्रो मात्रा भवतु सन्मनाः। जावा पत्ये मधुवतीं वाचे वदतु शांतिवाम् ॥

d) प्रवेपा मा बृहतो माद्यन्ति प्रवतेजा इरिने वर्वृतानाः। सोमस्येव मजावतस्य भक्षो विभीदको जाग्रीविर्ममाच्छन्॥

प्रथ - 2 निघ्रलिखित में से किन्हीं दो प्रबों के उत्तर दीजिए -

a) स्वरित क्या होता है? वैदिक संस्कृत में इसका क्या महत्त्व है? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।

b) वैदिक शब्दरूप लौकिक संस्कृत के शब्दरुपों से किस प्रकार भिन्न होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

c) वैदिक तत्त्वार्थक एवं तुमार्थक प्रत्यय

d) वैदिक संस्कृत में स्वर एवं पदपाठ का क्या महत्त्व है? संक्षेप में समझाइए।

प्रथ- 3 किन्हीं दो प्रथों के उत्तर दीजिए-

a) हिरण्यगर्भ सूक्त का दार्शनिक महत्त्व लिखिए।

b) उषा सूक्त के आधार पर उषा देवी का वर्णन कीजिए।

c) सामनस्यम् सूक्त के अनुसार सामजिक सौहार्द का स्वरुप लिखिए।

d) शिव संकल्प सूक्त में मन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

प्रथ- 4 निम्नलिखित में से किसी एक की व्याख्या कीजिए

a) सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्वृषयो ह्यप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमे निधनम् ॥

b) सर्वे वेदा यत्पादं अमनन्ति तपांसि सर्वाणि च यद्वदन्ति। यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेन ब्रवीमि ॐ इति एतत् ॥

c) यथा नाः स्यन्द्मनाः समुद्रेऽस्ते गच्छन्ति नामरूपे विहाय। तथा विद्वान् नामरूपाद्विमुक्तः परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥

प्रश्न - 5 मुंडकोपनिषद के 'पराथिया' गौड़ 'मप्रा विद्या' में गधा का क्या अर्थ है?

उनके महत्व पर प्रकाश डालिए।

अथवा

मुंडकोपनिषद के अनुसार आत्मा की प्राप्ति कितनी संभव है? विस्तार से लिखें।

 


BSKC 111 (January 2026 - July 2026) - HINDI

सत्रीय कार्य : BSKC-111 वैदिक साहित्य

सत्रीय कार्य – BSKC-111/TMA/2026-27                                                 पूर्णांक - 100

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।

प्रश्न - 1 निम्नलिखित में से किन्हीं दो मन्त्रों की व्याख्या कीजिए -

a) उषो वाजेन वाजिनि प्रचेता: स्तोमं जुषस्व गृणतो मघौनि ।
पुराणी देवी युवति: पुरन्धिरनुव्रतं चरसि विश्ववारे ।। ।।

b) हिरण्यगर्भ: समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् ।
स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥

c) सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्मयज्ञ: पृथिवीं धारयन्ति ।
सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथ्वी नः कृणोतु ॥

d) येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीरा: ।
यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मन: शिवसङ्कल्पमस्तु ॥2 ।।

प्रश्न - 2 निम्नलिखित में से किसी दो पर टिप्पणी लिखिए                                          

वैदिक लेट् लकार, स्वरित, पद-पाठ

प्रश्न - 3 किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए -                                                        
a. ऋग्वैदिक परंपरा में अग्नि देवता के स्वरूप का दार्शनिक एवं प्रतीकात्मक विश्लेषण कीजिए।

b. हिरण्यगर्भ सूक्त को सृष्टि-दर्शन का आधार-ग्रंथ मानते हुए, उसमें प्रतिपादित ईश्वर-तत्त्व की अवधारणा का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए तथा उपनिषदिक ब्रह्म-चिन्तन से उसकी तुलना कीजिए।

c. शिवसंकल्प सूक्त में वर्णित 'मन' की अवधारणा का मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक विश्लेषण कीजिए तथा भारतीय चिंतन-परंपरा में मन-नियंत्रण की भूमिका पर समीक्षात्मक टिप्पणी कीजिए।

प्रश्न - 4 निम्नलिखित में से किसी एक की व्याख्या कीजिए                                      

a) तदेतत् सत्यं मन्त्रेषु कर्माणि कवयो यान्यपश्यंस्तानि त्रेतायां बहुधा संततानि।

तान्याचरथ नियतं सत्यकामा एष वः पन्थाः सुकृतस्य लोके ॥

b) यत् तदद्रेश्यमग्राह्यमगोत्रमवर्णमचक्षुःश्रोत्रं तदपाणिपादम्।

नित्यं विभुं सर्वगतं सुसूक्ष्मं तदव्ययं यद् भूतयोनिं परिपश्यन्ति धीराः ॥ ॥

a) नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।

यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥

प्रश्न - 5 मुण्डक उपनिषद् में प्रतिपादित 'परा विद्या' और 'अपरा विद्या' के सिद्धान्त का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए ।

अथवा

मुण्डक उपनिषद् में वर्णित 'द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया' रूपक की दार्शनिक व्याख्या करते हुए जीव, आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध का समीक्षात्मक विश्लेषण कीजिए ।

 

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