IGNOU BAASK BSKC 132 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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BSKC 132: संस्कृत गद्य साहित्य
| Title Name | IGNOU BAASK BSKC 132 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | BACHELOR DEGREE PROGRAMMES |
| Course Code | BAASK |
| Course Name | अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि |
| Subject Code | BSKC 132 |
| Subject Name | संस्कृत गद्य साहित्य |
| Year | 2025 2026 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | BSKC 132/Assignment-1/2025 2026 |
| Product Description | Assignment of BAASK (अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि) 2025 2026. Latest BSKC 132 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2025 Session: 31st March, 2026
- July 2025 Session: 30th September, 2025
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BSKC 132 2025 - Hindi
सत्रीय कार्य
BSKC - 132
संस्कृत गद्य साहित्य
पाठ्यक्रम कोड: BSKC-132
पाठ्यक्रम शीर्षक: संस्कृत गद्य साहित्य
सत्रीय कार्य : BSKC-132/TMA/2025-25
संख्या: 100
नोट - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं: -
खण्ड-क
(व्याख्यात्मक प्रश्न )
1. अधोलिखित गद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) एवं विधयापि चानया दुराचारया कथमपि दैववशेन परिगृहीताः विक्लवा भवन्ति राजानः, सर्वाविनयाधिष्ठानतां च गच्छन्ति। तथाहि अभिषेकसमय एव चैतेषां मङ्गलकलशजलैरिव प्रक्षाल्यते दाक्षिण्यम्। अग्निकार्यधूमेनेव मलिनीक्रियते हृदयम्, पुरोहितकुशाग्र सम्मार्जनीभिरिव अपह्नियते क्षान्तिः, उष्णीषपट्टबन्धेनेव आच्छाद्यते जरागमनस्मरणम्, आतपत्रमण्डलेनेव अपसार्यते परलोकदर्शनम्, चामरपवनैरिव अपह्नियते सत्यवादिता, वेत्रदण्डैरिव उत्सार्यन्ते गुणाः, जयशब्दकलकलैरिव तिरस्क्रियन्ते साधुवादाः, ध्वजपट पल्लवैरिव परामृश्यते यशः ।
अथवा
जातुषाभरणानीव सोष्माणं न सहन्ते, दुष्टवारणा इव महामानस्तम्भनिश्चलीकृताः न गृह्णन्ति उपदेशम्, तृष्णाविषमूच्छिताः कनकमयमिव सर्व पश्यन्ति, इषव इव पानवर्धिततैक्षण्याः परप्रेरिताः विनाशयन्ति, दूरस्थितान्यपि फलानीव दण्डनिक्षेपैः महाकुलानि शातयन्ति । अकालकुसुमप्रसवा इव मनोहराकृतयोऽपि लोकविनाशहेतवः, श्मशानाग्नय इव अतिरौद्रभूतयः, तैमिरिका इव अदूरदर्शिनः, उपसृष्टा इव क्षुद्राधिष्ठितभवनाः, श्रूयमाणा अपि प्रेतपटहा इवोद्वेजयन्ति, चिन्त्यमाना अपि महापातकाध्यवसाया इव उपद्रवमुपजनयन्ति, अनुदिवसमापूर्यमाणा पापेनेव आध्मातमूर्तयो भवन्ति, तदवस्थाश्च व्यसनशतशरव्यतामुपगताः वल्मीकतृणाग्रावस्थिताः जलबिन्दव इव पतितमप्यात्मानं नावगच्छन्ति ।
(ख) भगवन्! श्रूयतां यदि कुतूहलम् । ह्यः सम्पादित-सायन्तन-कृत्ये, अत्रैव कुशाऽऽस्तरण मधिष्ठिते मयि, परितः समासीनेषु छात्रवर्गेषु, धीर-समीर-स्पर्शन मन्दमन्दमान्दोल्यमानासु व्रततिषु, समुदिते यामिनी-कामिनी-चन्दनबिन्दौ इव इन्दौ, कौमुदी-कपटेन सुधाधारामिव वर्षति गगने, अस्मन्नीतिवार्ता शुश्रूषुषु इव मौनमाकलयत्सु-पतंग-कुलेषु कैरव-विकाश-हर्ष-प्रकाश-मुखरेषु च'चरीकेषु, अस्पष्टाक्षरम्, कम्पमान-निःश्वासम्, लथत्कण्ठम्, घर्घरितस्वनम्, चीत्कारमात्रम्, दीनतामयम्, अत्यवधान-श्रव्यत्वादनुमितदविष्ठतं क्रन्दनमश्रौषम् ।
अथवा
अथ स मुनिः "भगवन् । धैर्येण, प्रसादेन, प्रतापेन, तेजसा, वीर्येण, विक्रमेण, शान्त्या, श्रिया, सौख्येन, धर्मेण विद्यया च सममेव परलोकं सनाथितवति तत्रभवति वीरविक्रमादित्ये, शनैः शनैः पारस्परिकविरोध-विशिथिली-कृतस्नेहबन्धनेषु राजसु, भामिनी-भूभङ्ङ्ग-भूरिभाव-प्रभाव-पराभूत-वैभवेषु भटेषु, स्वार्थ-चिन्ता-सन्तान-वितानैकतानेष्वमात्यवर्गेषु, प्रशंसामात्रप्रियेषु प्रभुषु, "इन्द्रस्त्वं वरुणस्त्वं कुबेरस्त्वम्" इति वर्णनामात्रसक्तेषु बुधजनेषु कश्चन गजिनी-स्थाननिवासी महामदो यवनः ससेनः प्राविशद् भारते वर्षे। स च प्रजा विलुण्ठ्य, मन्दिराणि निपात्य, प्रतिमा विभिय, परश्शतान् जनांश्च दासीकृत्य, शतश उष्ट्रेषु रत्नान्यारोप्य स्वदेशमनैषीत् ।
खण्ड-ख
(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
नोट: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 700 शब्दों (प्रत्येक) में लिखिए।
2. पंडिता क्षमाराव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालिए ।
अथवा
गद्यकाव्य की विकास यात्रा का वर्णन कीजिए ।
3. 'शुकनासोपदेश' के आधार पर 'लक्ष्मी के स्वाभाव का वर्णन कीजिए।
अथवा.
'शिवराजविजय के आधार पर कन्या का वर्णन कीजिए।
खण्ड-ग
(लघु उत्तरीय प्रश्न)
नोटः निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में दीजिए
4. वैदिक एवं लौकिक गद्य को स्पष्ट कीजिए ।
5. अम्बिकादत्त व्यास का जीवन परिचय लिखिए I
6. 'शुकनासोपदेश' के अनुसार चन्द्रपीड का वर्णन कीजिए।
7. 'शिवराजविजय' में वर्णित योगिराज का वर्णन कीजिए ।
8. महाकवि भारवि की भाषाशैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
9. नीति अथवा लोककथा से सम्बंधित किसी एक ग्रन्थ का परिचय लिखिए ।
10. 'धनपाल के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
BSKC 132 (January 2025 - July 2025) - HINDI
पूर्णांक : 100
नोट-सभी प्रत्र अनिवार्य हैं:-
खण्ड-क
सत्रीय कार्य
बीएसकेसी-132
संस्कृत गद्य साहित्य
पाठ्यक्रम कोड: BSKC-132
पाठ्यक्रम शीर्षक: संस्कृत गद्य साहित्य
सत्रीय कार्य: BSKC-132/TMA/2025-26
(व्याख्यात्मक प्रश्न)
1.अधोलिखित गद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या:
(क) एवं विद्यापि चान्या दुराचार्य कथमपि दैववशेन परिगृहीताः विक्ल्वा भवन्ति राजानः, सर्वविन्याधिष्ठानं च गच्छन्ति। तथाहि अभिषेकसमय एवं चैतेषां मङ्गलकलशजलैरिव प्रक्षाल्यते दाक्षिण्यम्। अग्निकार्यधूमेनेव मालिनीक्रियते हृदयम्, पुरोहितकुशाय सम्मर्नीभिरिव अपध्याते काशन्तिः, उष्णीशपतत् बंधेनेव अच्चयते जरागमनस्मरणम्, आत्पत्रमंडलनेव अप्सर्यते परलोकदर्शनम्, चामरपवनैरिव अपह्यते सत्यवादिता, वेन्दाण्डैरिव उत्सार्यन्ते गुणः, जयशब्दकलकनैरिव त्रिस्क्रियन्ते साधुवादः, ध्वजपट पल्लवैरिव परमृष्यते यशः।
अथवा
जातुषाभरणाय शोषमानं न शांत्ते, दुष्टाणा इव महामानस्तंभनिश्चलिदाः न घृण्ण्ति उपदेशम्, तृष्णाविषमुच्छिताः कनकमयमिव सर्व पश्यन्ति, इषाय इव पानभागतैक्षण्यः परा आद्यः विनाशन्ति, दुष्टितान्यपि फलानीव दण्डनिकेरैः महाकुलानि शतयन्ति। अकालकुसुमप्रसवा इव मनोहरकृतयोऽपि लोकविनाशेतव:, शमशानय इव अतिरौद्रभूतय:, तामीरिका इव अदूरदर्शिन:, उपसृष्टा इव क्षुद्रधिष्ठितभवना:, श्रूयमाणा अपि प्रेतपथा इवोडेदेजयन्ति, चिन्त्यमाना अपि महापातकाध्यवसाया इव अपूर्वमुपजनयन्ति, अनुदिवसमापुर्यमाना पापेनेव अध्मातमूर्तयो भवन्ति, तदवस्थाश्च व्यंजनात्श्रव्यतामुपगतः वल्मिकतृणयावस्थिताः जलबिन्दव इव पतितमप्यात्मानं नावगच्छन्ति।
(ख) भगवान। श्रूयतां यदि कुतुहलम्। हाः संपादित-सयंतन-कृत्ये, अत्रैव कुशाऽऽस्त्रां मधिष्ठिते मयि, परितः समासीनेषु विद्यार्थीवर्गेषु, धीर-समीर-स्पर्शन मंदमंदमांडोल्यमानसु व्रततिषु, समुदिते यामिनी-कामिनी-चंदनविंदों इव इंदों, कौमुदी-कपतेन सुधाधर्मिव वर्षति गगने, अस्मानति तम् शुश्रूषु श्वा मौनमाकलयत्सु-पतंग-कुलेषु कैरव-विकास-हर्ष-प्रकाश-मुखरेषु चचरीकेशु, अनादिाक्षरम्, कम्पमान-निःश्वसम्, श्रयत्कंठम्, घृघृतस्वन्म्, चात्रा चिमात्रम्, दीनतामयम्, अत्यवधान-श्रव्यत्वादनुमितदविष्ठतं क्रंदनमश्रौषम्।
अथवा
अथ स मुनिः "भगवान् गाधिरेण, प्रसादेन, प्रतापेन, तेजसा, वीर्येण, विक्रमेण, शांल्य, श्रिया, सौख्येन, धर्मेण विद्या च सममेव परलोकं सनथितवति तत्रभवति वीरविक्रमादित्ये, शनैः शनैः जगतविरोध-विशिथिली-कृतस्नेह बंध्नेषु राजसु, भामिनि-भूभद्ङ्ग-भूरिभाव-प्रभाव परभूत-वैभवेषु भतेषु, सावित-चिंता-संतान-वितानैकटनेश्वमात्यवर्गेषु, प्रशंसामात्राप्रियेषु प्रभुषु, 'इंद्रस्त्वं वरुणस्त्वं कुबेरस्त्वम्' इति वर्णनामात्रासक्तेषु बुधजनेषु कश्चन गजिनी-स्थाननिवासी महामदो यवनः ससेनः प्रविषद् भारते वर्षे। स च प्रजा विलुन्थ्य, मंदिराणि निपात्य, प्रतिमा विभी, पृष्ठशतं जनांश्च दासीकृत्य, शतश उष्टेषु रत्नान्यारोप्य स्वदेशमानैषीत्।
खण्ड-ख
(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
नोट
: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 700 शब्दों (प्रत्येक) में लिखिए।
2. पंडिता क्षमाराव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालिए ।
अथवा
गद्यकाव्य की विकास यात्रा का वर्णन कीजिए ।
3.'शुकनासोपदेश' के आधार पर 'लक्ष्मी के स्वाभाव का वर्णन कीजिए।
अथवा.
'शिवराजविजय के आधार पर कन्या का वर्णन कीजिए।
खण्ड-ग
(लघु उत्तरीय प्रश्न)
नोटः निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में दीजिए।
4. वैदिक एवं लौकिक गय को स्पष्ट कीजिए ।
5. अम्बिकादत्त व्यास का जीवन परिचय लेख
6. 'शुकनासोपदेश' के अनुसार चन्द्रपीड का वर्णन कीजिए।
7. 'शिवराजविजय' में वर्णित योगिराज का वर्णन कीजिए ।
8. महाकवि भारवि की भाषाशैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
9. नीति अथवा लोककथा से सम्बंधित किसी एक ग्रन्थ का परिचय लिखिए ।
10. 'धनपाल के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
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