IGNOU BAASK CBKG 2 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

CBKG 2 Solved Assignment
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CBKG 2: कालगणना की विधियाँ

Title Name IGNOU BAASK CBKG 2 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BAASK
Course Name अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि
Subject Code CBKG 2
Subject Name कालगणना की विधियाँ
Year 2026 2027
Session -
Language English Medium
Assignment Code CBKG 2/Assignment-1/2026 2027
Product Description Assignment of BAASK (अनुप्रयुक्त संस्कृत में स्नातक उपाधि) 2026 2027. Latest CBKG 002 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • January 2025 Session: 30th September, 2025
  • July 2025 Session: 30th April, 2025
  • January 2026 Session: 30th April, 2026
  • July 2026 Session: 30th November, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
Scoring: Designed to help students achieve 90+ marks.
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Included:

CBKG 2 2025 - Hindi

सत्रीय कार्य : CBKG-002

कालगणना की विधियाँ

सत्रीय कार्य - CBKG-002/TMA/2025-26

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।

1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 500 शब्दों में) दीजिए। (20 × 2 = 40)

i) भारतीय कालगणना की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाइए।

ii) अधिक मास और क्षय मास की संकल्पना को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।

iii) भारतीय कालगणना में सप्ताह एवं दिनों की संकल्पना क्या है? उनके नामकरण की पद्धति समझाइए।

iv) अयन का अर्थ स्पष्ट करते हुए उत्तरायण एवं दक्षिणायन के महत्व को समझाइए।

2. निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 250 शब्दों में) दीजिए। (10 × 4 = 40)

i) भारतीय कालगणना की व्यावहारिक उपयोगिता को एक उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

ii) अमूर्त काल से क्या अभिप्राय है? इसका विवरण दीजिए।

iii) मुहूर्त किसे कहते हैं? इसकी गणना किस प्रकार की जाती है?

iv) करण क्या होते हैं? उनके स्वरूप का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

v) चंद्र ग्रहण के कारणों को स्पष्ट करें एवं यह किस तिथि को घटित होता है?

vi) ऋतु परिवर्तन किस कारण से होता है? इसका वैज्ञानिक और ज्योतिषीय विश्लेषण कीजिए।

vii) अधिक मास की अवधारणा क्या है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए। (10 × 2 = 20)

i) भारतीय कालगणना में मौसम के ज्ञान के लिए किन कारकों का अध्ययन किया जाता है?

ii) काल के दो प्रकारों का वर्णन किस ग्रंथ में प्राप्त होता है?

iii) दिन में कुल कितने मुहूर्त होते हैं?

iv) सप्ताह का सबसे प्राचीन उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?

v) भारतीय आषाढ़ मास का क्या अर्थ है?

vi) भारत में चांद्र मासों को अपनाने के प्रमुख कारण क्या हैं?

vii) 12 वर्षों के युग का संबंध किस ग्रह से माना जाता है?

viii) कालगणना में "धर्म" शब्द किस संख्या का प्रतीक है?

ix) कुल कितने मन्वंतर होते हैं, और वर्तमान में कौन-सा मन्वंतर चल रहा है?

x) कालगणना में कल्प की संकल्पना क्या है?


CBKG 002 (January 2025 - July 2025) - HINDI

सत्रीय कार्य: CBKG-002

कालगणना की विधियाँ

सत्रीय कार्य - CBKG-002/TMA/2025-26

पर्णांक - 100

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रक्षों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 500 शब्दों में) दीजिए 

i) भारतीय कालगणना की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाइए।

ii) अधिक मास और क्षय मास की संकल्पना को विस्तार से स्पष्ट कीजिए

iii) भारतीय कालगणना में सप्ताह एवं दिनों की संकल्पना क्या है? उनके नामकरण की पद्धति समझाइए

iv) अयन का अर्थ स्पष्ट करते हुए उत्तरायण एवं दक्षिणायन के महत्व को समझाइए।

2. निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रक्षों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 250 शब्दों में) दीजिए

i) भारतीय कालगणना की व्यावहारिक उपयोगिता को एक उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

ii) अमूर्त काल से क्या अभिप्राय है? इसका विवरण दीजिए।

iii) मुहूर्त किसे कहते हैं? इसकी गणना किस प्रकार की जाती है?

iv) करण क्या होते हैं? उनके स्वरूप का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

v) चंद्र ग्रहण के कारणों को स्पष्ट करें एवं यह किस तिथि को घटित होता है?

vi) ऋतु परिवर्तन किस कारण से होता है? इसका वैज्ञानिक और ज्योतिषीय विश्लेषण कीजिए।

vii) अधिक मास की अवधारणा क्या है? इसे उदाहरण सहित समझाइए

3. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए 

i) भारतीय कालगणना में मौसम के ज्ञान के लिए किन कारकों का अध्ययन किया जाता है?

ii) काल के दो प्रकारों का वर्णन किस ग्रंथ में प्राप्त होता है?

iii) दिन में कुल कितने मुहूर्त होते हैं?

iv) सशाह का सबसे प्राचीन उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?

v) भारतीय आषाढ़ मास का क्या अर्थ है?

vi) भारत में चांद्र मासों को अपनाने के प्रमुख कारण क्या है?

vii) 12 वर्षों के युग का संबंध किस ग्रह से माना जाता है?

viii) कालगणना में "धर्म" शब्द किस संख्या का प्रतीक है?

ix) कुल कितने मन्वंतर होते हैं, और बर्तमान में कौन-सा मन्वंतर चल रहा है?

x) कालगणना में कल्प की संकल्पना क्या है?


CBKG 002 (January 2026 - July 2026) - HINDI

सत्रीय कार्य : CBKG-002

कालगणना की विधियाँ

सत्रीय कार्य – CBKG-002/TMA/2026-27

पूर्णांक - 100

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।

1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 500 शब्दों में) दीजिए । 

i) भारतीय कालमान की संरचना (क्षण से कल्प तक) का दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण कीजिए तथा बताइए कि यह पद्धति भारतीय काल-बोध को कैसे अभिव्यक्त करती है ।

ii) तिथि-प्रणाली की विशेषताओं को स्पष्ट करते हुए ‘क्षय तिथि’ एवं ‘अधिक तिथि’ की अवधारणा का खगोलीय एवं गणनात्मक आधार सहित विवेचन कीजिए ।

iii) भारतीय पंचांग पद्धति में ‘दिन’ की संकल्पना पश्चिमी दिन-गणना से किस प्रकार भिन्न है? नामकरण, आधार एवं व्यावहारिक उपयोग के सन्दर्भ में विश्लेषण कीजिए।

iv) पक्ष, ग्रहण और ऋतु-चक्र की अवधारणा को पृथ्वी–चन्द्र–सूर्य की गतियों के आधार पर समझाइए तथा भारतीय कालगणना में उनके महत्त्व का विश्लेषण कीजिए ।

v) भारतीय मास-प्रणाली (चतुर्विध मास, अधिमास, क्षय मास) के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए सिद्ध कीजिए कि यह व्यवस्था काल-सामंजस्य की एक वैज्ञानिक विधि है ।

vi) ब्राह्म वर्ष, विष्णु वर्ष, शिव वर्ष एवं दैवी वर्ष की अवधारणा का विश्लेषण कीजिए तथा कालगणना में इनके प्रतीकात्मक एवं वैज्ञानिक पक्ष पर चर्चा कीजिए ।

2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए । 

i) सूक्ष्म काल इकाइयों (निमिष, त्रुटि, लव, काष्ठा) की आवश्यकता क्यों पड़ी?

ii) मुहूर्त की अवधारणा को सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से क्यों महत्त्वपूर्ण माना गया?

iii) अधिमास और क्षयमास क्यों जोड़े जाते हैं?

iv) अयन और संवत्सर का कालगणना में क्या स्थान है?

v) चतुर्युग और मन्वन्तर में क्या अंतर है?

vi) भारतीय वेधशालाएँ कालगणना की वैज्ञानिकता को कैसे प्रमाणित करती हैं?

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