IGNOU BAFSK BSKC 105 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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BSKC 105: लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक)
| Title Name | IGNOU BAFSK BSKC 105 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | BACHELOR DEGREE PROGRAMMES |
| Course Code | BAFSK |
| Course Name | कला स्नातक (संस्कृत) |
| Subject Code | BSKC 105 |
| Subject Name | लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक) |
| Year | 2026 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | BSKC 105/Assignment-1/2026 |
| Product Description | Assignment of BAFSK (कला स्नातक (संस्कृत)) 2026. Latest BSKC 105 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2026 Session: 31st March, 2026
- July 2026 Session: 30th September, 2026
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📋 Assignment Content Preview
BSKC 105 2025 - Hindi
सत्रीय कार्य : BSKC-105 लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक)
पाठ्यक्रम कोड BSKC - 105
पाठ्यक्रम शीर्षक : लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक)
सत्रीय कार्य : BSKC-105/TMA/2025-26
पूर्णांक : 100
नोट - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं: -
(क) व्याख्या आधारित प्रश्न :-
1. अधोलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: -
(अ) हृदय ! भव सकामं यत्कृते शङ्कसे त्वं
शृणु पितृनिधनं तद् गच्छ धैर्यं च तावत् ।
स्पृशति तु यदि नीचो मामयं शुल्कशब्द
-स्त्वथ च भवति सत्यं तत्र देहो विशोध्यः ॥
अथवा
अनुचरति शशाङ्क राहुदोषेऽपि तारा
पतति च वनवृक्षे याति भूमिं लता च ।
त्यजति न च करेणुः पङ्कलग्नं गजेन्द्रं
व्रजतु चरतु धर्म भर्तृनाथा हि नार्यः ॥
(ब) अन्तर्हित शशिनि सैव कुमुद्वती मे
दृष्टिं न नन्दयति संस्मरणीयशोभा ।
इष्टप्रवासजनितान्यबलाजनस्य
दुःखानि नूनमतिमात्रसुदुःसहानि ।।
अथवा
अभिजनवतो भर्तुः श्लाघ्ये स्थिता गृहिणीपदे
विभवगुरुभिः कृत्यैस्तस्य प्रतिक्षणमाकुला ।
तनयमचिरात् प्राचीवार्क प्रसूय च पावनं
मम विरहजां न त्वं वत्से शुचं गणयिष्यसि ॥
(ग) उल्लङ्घयन् मम समुज्ज्वलतः प्रतापं
कोपस्य नन्दकुलकाननधूमकेतोः ।
सद्यः परात्मपरिमाणविवेकमूढः
कः शालभेन विधिना लभतां विनाशम् ॥
अथवा
पुरुषस्य जीवितव्यं विषमाद् भवति भक्तिगृहीतात् ।
मारयति सर्वलोकं यस्तेन यमेन जीवामः ॥
(ख) लघु उत्तरीय प्रश्न :-
2. भवभूति के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को बताइए ।
3. प्रतिमानाटक के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए।
4. "शरीरेऽरिः प्रहरति हृदये स्वजनः" इस सूक्ति को स्पष्ट कीजिए।
5. 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक में प्रकृति के मानवीकरण को किस प्रकार दर्शाया गया है? स्पष्ट कीजिए ।
6. मुद्राराक्षसम् नाटक के तृतीय अंक के सार का वर्णन कीजिए ।
(ग) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :-
7. चाणक्य के चरित्र-चित्रण का सविस्तार विवेचन कीजिए ।
8. संस्कृत नाटकों की उत्पत्ति सम्बन्धी पाश्चात्य मतों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
9. 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक की कथावस्तु का सविस्तार वर्णन कीजिए ।
10. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर टिप्पणी लिखिएः -
(अ) प्रहसन
(ब) सूत्रधार
(स) पूर्वरंग
(द) नेपथ्य
BSKC 105 (January 2026 - July 2026) - SANSKRIT
सत्रीय कार्य : BSKC – 105 लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक)
पाठ्यक्रम कोड BSKC – 105
पाठ्यक्रम शीर्षक : लौकिक संस्कृत साहित्य (नाटक)
सत्रीय कार्य : BSKC – 105/TMA/2026
पूर्णांक : 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं :-
(क) व्याख्या आधारित प्रश्न :- 10X3=30
1. अधोलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: -
(अ) आरब्धे पटहे स्थिते गुरुजने भद्रासने लङ्घिते
स्कन्धोच्चारणनम्यमानवदनप्रच्योतितोये घटे ।
राजाहूय विसर्जिते मयि जनो धैर्येण मे विस्मितः
स्वः पुत्रः कुरुते पितुर्यदि वचः कस्तत्र भो ! विस्मयः ?
अथवा
हृदय ! भव सकामं यत्कृते शङ्कसे त्वं
शृणु पितृनिधनं तद् गच्छ धैर्यं च तावत् ।
स्पृशति तु यदि नीचो मामयं शुल्कशब्द-
स्त्वथ च भवति सत्यं तत्र देहो विशोध्यः ॥
(ब) पातुं न प्रथमं व्यवस्यति जलं युष्मास्वपीतेषु या
नादत्ते प्रियमण्डनाऽपि भवतां स्नेहेन या पल्लवम्।
आद्ये वः कुसुमप्रसूतिसमये यस्या भवत्युत्सवः
सेयं याति शकुन्तला पतिगृहं सर्वैरनुज्ञायताम्॥
अथवा
सङ्कल्पितं प्रथममेव मया तवार्थे
भर्तारमात्मसदृशं सुकृतैर्गता त्वम् ।
चूतेन संश्रितवती नवमालिकेय-
मस्यामहं त्वयि च सम्प्रति वीतचिन्तः ॥
(ग) वहति जलमियं पिनष्टि गन्धानियमियमुद्धूयते स्रजो विचित्राः ।
मुसलमिदमियञ्च पातकाले मुहरनुयाति कलेन हुङ्कृतेन ॥
अथवा
उल्लङ्घयन् मम समुज्ज्वलतः प्रतापं
कोपस्य नन्दकुलकाननधूमकेतोः ।
सद्यः परात्मपरिमाणविवेकमुढः
कः शालभेन विधिना लभतां विनाशम् ॥
(ख) लघु उत्तरीय प्रश्न : - 5X5=25
2. प्रतिमानाटक के आधार पर राम का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
3. भास विरचित उदयन कथाश्रित नाटकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
4. समवकार रूपक को लक्षण सहित स्पष्ट कीजिए ।
5. ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अंक के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए ।
6. “शरीरेऽरिः प्रहरति हृदये स्वजनः” इस सूक्ति को स्पष्ट कीजिए ।
(ग) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न : -
7. संस्कृत नाट्य साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए । 10
8. मुद्राराक्षस नाटक के नामकरण एवं कथासार का सविस्तार विवेचन कीजिए । 10
9. संस्कृत नाटकों की उत्पत्ति सम्बन्धी भारतीय मतों का विस्तृत वर्णन कीजिए । 10
10. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर टिप्पणी लिखिए: - 5X3=15
(अ) नान्दी (ब) अङ्कास्य
(स) चाणक्य (द) सूत्रधार
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