IGNOU BHDC 103 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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BHDC 103: आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिन्दी कविता
| Title Name | IGNOU BHDC 103 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | BACHELOR DEGREE PROGRAMMES |
| Course Code | BAHDH |
| Course Name | Bachelor of Arts (Honours) Hindi |
| Subject Code | BHDC 103 |
| Subject Name | आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिन्दी कविता |
| Year | 2025 2026 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | BHDC 103/Assignment-1/2025 2026 |
| Product Description | Assignment of BAHDH (Bachelor of Arts (Honours) Hindi) 2025 2026. Latest BHDC 103 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2025 Session: 31st October, 2025
- July 2025 Session: 30th April, 2025
- July 2025 Session: 31st October, 2025
- January 2026 Session: 30th April, 2026
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BHDC 103 (January 2025 - July 2025) - HINDI
आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिंदी कविता
सत्रीय कार्य
(खंड 1 से 4 पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड: बी.एच.डी.सी.-103
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी.-103/बी.ए.एच.डी.एच./2025
कुल अंक : 100
नोट: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। दस अंक के प्रश्नों का उत्तर लगभग आठ सौ शब्दों में तथा पाँच अंकों के प्रश्नों के उत्तर लगभग चार सौ शब्दों में दीजिए।
भाग-1
1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिएः
(क) सुधामुखि के बिहि निरमलि बाला।
अपरुब रूप मनोभवमंगल
त्रिभुवन विजयी माला ।।
सुन्दर बदन चारु अरु लोचन
काजर-रंजित भेला। कनक-कमल माझे काल भुजंगिनि
श्रीयुत खंजन खेला ।।
नाभि बिबर सएं लोम-लतावलि
भुजगि निसास-पियासा
नासा खगपति-चंचु भरम-मय
कुच-गिरि-संधि निवासा ।।
(ख) संतो भाई आई ग्यांन की आंधी रे।
भ्रम की टाटी समै उड़ांनी माया रहै न बांधी रे।।
दुचिते की दोइ थूनि गिरांनीं मोह बलेंडा टूटा।
त्रिसना छांनि परी घर ऊपरि दुरमति भांडा फूटा।।
आंधी पाछे जो जल बरसै तिहिं तेरा जन भींना।
कहै कबीर मनि भया प्रगासा उदै भानु जब चींना ।।
(छ) ऊधौ तुम हो चतुर सुजान।
हमकाँ तुम सोइ सिखा दीजौ, नन्द सुवन की आन।।
अमीश है भोजन हित जाकौ, सो क्यों सागहिं मन।
ता मुख सेम पात क्यों परसत, जा मुख से पात।।
किंगरी स्वर कैसें सचु मनत, सुनि मुरली की तान।
सुख तो ता दिन होइ सुर ब्रज, जा दिन आवै कान्ह।।
(घ) एकै साधे सब साधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।।
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति अजादे जे कसे, तो ही साँचे मीत।।
छिमा बदन को चाहिए, छोटे को उतपात।
कैम रहन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी घात।।
भाग-2
2. जायसी की भक्ति में प्रेम के महत्त्व की विवेचना कीजिए।
3. कबीर की सामाजिक चेतना के प्रमुख पक्षों का उल्लेख कीजिए।
4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए :
(क) सूरदास की भक्ति भावना
(ख) तुलसी का रामराज्य
भाग-3
5. घनानंद की श्रृंगार भावना की विशिष्टताओं का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।
6. रहीम की रचनात्मक विशिष्टताओं का उल्लेख कीजिए।
7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए :
(क) मीरा का काव्य सौंदर्य
(ख) विद्यापति का काव्य सौंदर्य
BHDC 103 (July 2025 - January 2026) - HINDI
आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिंदी कविता सत्रीय कार्य (खंड 1 से 4 पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.-103
सत्रीय कार्य कोड: बी.एच.डी.सी.-103/बी.ए.एच.डी.एच./2026
कुल अंक : 100
नोट: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। दस अंक के प्रश्नों का उत्तर लगभग आठ सौ शब्दों में तथा पाँच अंकों के प्रश्नों के उत्तर लगभग चार सौ शब्दों में दीजिए।
भाग-1
1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिएः
(क) गोरी सोवै सेज पर मुख पर डारे केस ।
चल खुसरो घर आपने रैन भई चहुँ देस ॥
सरो रैन सोहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पिऊ को दोऊ भए एक रंग ॥
(ख) हम न मरें मरिहै संसारा ।
हमको मिला जिआबनहारा ।।
साकत मरहिं संत जन जीवहिं भरि भरि राम रसाइन पीवहिं ।
हरि मरहिं तो हमहूँ मरिहैं, हरि न मरे हम काहे कौ मरिहैं ।
कहै कबीर मन मनहिं मिलावा अमर भया सुखसागर पावां ।।
(ग) अंखियां हरि-दरसन की प्यासी ।
देख्यौ चाहत कमलनैन कौ निसिदिन रहति उदासी ।।
आए उधौ फिरि गए आंगन, डारि गए फांसी ।
केसरि तिलक मोतिन की माला, वृन्दावन के बासी ।।
काहू के मन को कोउ न जानत लोगन के मन हांसी ।
सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस को करवत लैहौं कासी ।।
(घ) खेती न किसान को भिखारी को न भीख, बलि, बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी ।
जीविका विहीन लोग सीदमान सोच बस, कहैं एक एकन सों, 'कहाँ जाई का करी?
बेदहूँ पुरान कही लोकहूँ बिलोकिअत, साँ सबै पै, राम! रावर कृपा करी ।
दारिद - दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु ! दुरित - दहन देखि तुलसी हहा करी ।।
भाग-2
2. तुलसीदास की भक्ति में प्रेम के महत्व की विवेचना कीजिए ।
3. रहीम लोक जीवन के पारखी थे। इस कथन की समीक्षा कीजिए ।
4. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:
क. मीराबाई की भक्ति भावना
ख. सतसई परम्परा और बिहारी सतसई
भाग-3
5. रसखान की भक्ति भावना की विशिष्टताओं का सोदाहरण उल्लेख कीजिए ।
6. सूर के काव्य न ब्रज का लोकजीवन किन रूपों में आया है? सोदाहरण उल्लेख कीजिए ।
7. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए:
(क) जायसी की भाषा और काव्य सौंदर्य
(ख) विद्यापति का काव्य सौंदर्य
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