IGNOU BHDE 143 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

BHDE 143 Solved Assignment
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BHDE 143: प्रेमचंद

Title Name IGNOU BHDE 143 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BAG
Course Name BACHELOR OF ARTS
Subject Code BHDE 143
Subject Name प्रेमचंद
Year 2026
Session -
Language English Medium
Assignment Code BHDE 143/Assignment-1/2026
Product Description Assignment of BAG (BACHELOR OF ARTS) 2026. Latest BHDE 143 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • July 2025 Session: 31st March, 2026
  • January 2026 Session: 30th September, 2026

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Included:

BHDE 143 2025 - Hindi

प्रेमचंद

(BHDE-143)

सत्रीय कार्य

पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.ई-143

सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई-143/टीएमए/2025

कुल अंक 100

नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

भाग-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

(क) निस्सन्देह, काव्य और साहित्य का उद्देश्य हमारी अनुभूतियों की तीव्रता को बढ़ाना है, पर मनुष्य का जीवन केवल स्त्री-पुरुष प्रेम का जीवन नहीं है। क्या वह साहित्य, जिसका विषय श्रृंगारिक मनोभावों और उनसे उत्पन्न होने वाली विरह व्यथा, निराशा आदि तक ही सीमित हो-जिसमें दुनिया और दुनिया की कठिनाइयों से दूर भागना ही जीवन की सार्थकता समझी गयी हो, हमारी विचार और भाव संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। श्रृंगारिक मनोभाव मानव जीवन का एक अंग मात्र है और जिस साहित्य का अधिकांश इसी से संबंध रखता हो, वह उस जाति और उस युग के लिए गर्व करने की वस्तु नहीं हो सकता और न उसकी सुरुचि का ही प्रमाण हो सकता है।

(ख) बिरला ही कोई भला आदमी होगा, जिसके सामने बुढ़िया ने दुःख के आँसू न बहाये हों। किसी ने तो यों ही ऊपरी मन से हूँ-हाँ करके टाल दिया, और किसी ने इस अन्याय पर जमाने को गालियाँ दीं! कहा-कब्र में पाँव लटके हुए हैं, आज मरे कल दूसरा दिन; पर हवस नहीं मानती। अब तुम्हें क्या चाहिए ? रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो। तुम्हें अब खेती-बारी से क्या काम है ? कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य रस के रसास्वादन का अच्छा अवसर मिला। झुकी हुई कमर, पोपला मुँह, सन के से बाल-इतनी सामग्री एकत्र हों, तब हँसी क्यों न आवे ? ऐसे न्यायप्रिय, दयालु, दीन-वत्सल पुरुष बहुत कम थे, जिन्होंने उस अबला के दुखड़े को गौर से सुना हो और उसको सांत्वना दी हो।

(ग) खिलौने से क्या फायदा? व्यर्थ में पैसे खराब होते हैं। जरा देर ही तो खुशी होती है। फिर तो खिलौने को कोई आँख उठाकर नहीं देखता। या तो घर पहुँचते-पहुँचते टूट-फूट बराबर हो जायेंगे या छोटे बच्चे जो मेले में नहीं आये हैं जिद कर के ले लेंगे और तोड़ डालेंगे। चिमटा कितने काम की चीज है। रोटियों तवे से उतार लो, चूल्हें में सेंक लो। कोई आग माँगने आये तो चटपट चूल्हे से आग निकालकर उसे दे दो। अम्मों बेचारी को कहाँ फुरसत है कि बाजार आयें और इतने पैसे ही कहाँ मिलते हैं? रोज हाथ जला लेती हैं।

(घ) दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी। वह मारते-मारते थक गया, पर दोनों ने पाँव न उठाया। एक बार जब उस निर्दयी ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाये तो मोती का गुस्सा काबू से बाहर हो गया। हल लेकर भागा। हल, रस्सी, जुआ, जोत, सब टूट-टाटकर बराबर हो गया। गले में बड़ी-बड़ी रस्सियों न होतीं तो दोनों पकड़ाई में न आते।

भाग-ख

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750-800 शब्दों में दीजिए।

(1) प्रेमचंद के कहानियों का परिचय देते हुए उनकी विशेषताएँ बताइए।

(2) पंच परमेश्वर कहानी की शिल्पगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

(3) ईदगाह' कहानी की भाषा और शैली की विशेषताएँ उदाहरण सहित बताइए।

भाग-ग

3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :

(1) प्रेमचंद के नाटक

(2) शतरंज के खिलाड़ी कहानी का सार

(3) 'सेवासदन' की भाषा


BHDE 143 (July 2025 - January 2026) - HINDI

प्रेमचंद

(BHDE-143)

सत्रीय कार्य

पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.ई-143

सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई-143/ टीएमए/2025-2026

कुल अंक 100

नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

भाग-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

 

(क). व्यंग्य और क्रोध में आग और तेल का संबंध है। व्यंग्य हृदय को इस प्रकार विदीर्ण कर देता है जैसे छैनी बर्फ के टुकड़े को। सुमन क्रोध से विह्वल होकर बोली अच्छा तो जबान संभालो, बहुत हो चुका। घंटे भर से मुँह में जो अनाप-शनाप आता है, बकते जाते हो। मैं तरह देती जाती हूँ, उसका यह फल है। मुझे कोई कुलटा समझ लिया है।

(ख). नीतिशास्त्र और साहित्यशास्त्र का लक्ष्य एक ही है-केवल उपदेश की विधि में अंतरहै। नीतिशास्त्र तर्कों और उपदेशों के द्वारा बुद्धि और मन पर प्रभाव डालने का प्रयत्न करता है, साहितय ने अपने लिए मानसिक अवस्थाओं और भावों का क्षेत्र चुन लिया है। हम जीवन में जो कुछ देखते हैं या जो कुछ हम पर गुजरती है, वही अनुभव और वही चोटें कल्पना में पहुँकर साहित्य सृजन की प्रेरणा करती हैं। कवि या साहित्यकार में अनुभूति की जितनी तीव्रता होती है, उसकी रचना उतनी ही आकर्षक और ऊँचे दर्जे की होती है।

(ग). अब बस्ती घनी होने लगी। ईदगाह जानेवालों की टोलियाँ नजर आने लगी। एक से एक भड़कीले वस्त्र पहने हुए। कोई इक्के-ताँगे पर सवार, कोई मोटर पर, सभी इत्र में बसे, सभी के दिलों में उमंग। ग्रामीणों का यह छोटा-सा दल अपनी विपन्नता से बेखबर, सन्तोष ओर धैर्य में मगन चला जा रहा था। बच्चों के लिए नगर की सभी चीजें अनोखी थीं। जिस चीज की ओर ताकते, ताकते ही रह जाते और पीछे से बार-बार हार्न की आवाज होने पर भी न चेतते। हामिद तो मोटर के नीचे जाते-जाते बचा।

(घ). बिरला ही कोई भला आदमी होगा, जिसके सामने बुढ़िया ने दुःख के आँसू न बहाये हों। किसी ने तो यों ही ऊपरी मन से हूँ-हाँ करके टाल दिया, और किसी ने इस अन्याय पर जमाने को गालियाँ दीं कहा-कब्र में पाँव लटके हुए हैं, आज मरे कल दूसरा दिन; पर हवस नहीं मानती। अब तुम्हें क्या चाहिए ? रोटी खाओ और अल्लाह का नाम लो। तुम्हें अब खेती-बारी से क्या काम है? कुछ ऐसे सज्जन भी थे, जिन्हें हास्य रस के रसास्वादन का अच्छा अवसर मिला।

भाग-ख

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750-800 शब्दों में दीजिए।

(1). प्रेमचंद के वैचारिक गद्य का परिचय प्रस्तुत कीजिए।

(2). 'सेवासदन' की अंतर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।

(3) 'दो बैलों की कथा' के प्रमुख चरित्रों की विशेषताएँ बताइए।

भाग-ग

3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :

(1) हल्कू का चरित्र

(2) प्रेमचंद की कहानियाँ

(3) 'शतरंज के खिलाड़ी' कहानी का कथासार

 


BHDE 143 2026 - Hindi

प्रेमचंद

(BHDE-143)

सत्रीय कार्य

पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.ई-143

सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई-143/टीएमए/2026

कुल अंक 100

नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

भाग-क

1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।

(क) हमारा चरित्र कितना ही दृढ़ हो, पर उस पर संगति का असर अवश्य होता है। सुमन अपने पड़ोसियों को जितनी शिक्षा देती थी, उससे अधिक उनसे ग्रहण करती थी। हम अपने गार्हस्थ्य जीवन की ओर से कितने बेसुध हैं, उसके लिए किसी तैयारी, किसी शिक्षा की जरूरत नहीं समझते। गुड़िया खेलनेवाली बालिका, सहेलियों के साथ विहार करनेवाली युवती, गृहिणी बनने के योग्य समझी जाती है। अल्हड़ बछड़ के कंधे पर भारी जुआ रख दिया जाता है। ऐसी दशा में यदि हमारा गार्हस्थ्य जीवन आनन्दमय न हो तो कोई आश्चर्य नहीं।

(ख) सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। इस विशेष आत्मीयता ने उसमें एक नई स्फूर्ति पैदा कर दी थी, जो हवा के ठंडे झोंकों को तुच्छ समझती थी। वह झपटकर उठा और छपरी के बाहर आकर भैंकने लगा। हल्कू ने उसे कई बार चुमकार कर बुलाया, पर वह उसके पास न आया। हार में चारों तरफ दौड़-दौड़कर मूँकता रहा। एक क्षण के लिए आ भी जाता, तो तुरंत ही फिर दौड़ता। कर्त्तव्य उसके हृदय में अरमान की भाँति उछल रहा था।

(ग) दोनों सज्जन फिर जो खेलने बैठे, तो तीन बज गए। अब की मिरज़ा जी की बाजी कमजोर थी। चार का गजर बज ही रहा था कि फौज की वापसी की आहट मिली। नवाब वाज़िद अली पकड़ लिए गए थे और सेना उन्हें किसी अज्ञात स्थान को लिए जा रही थी। शहर में न कोई हलचल थी, न मार-काट। एक बूंद भी खून नहीं गिरा था। आज तक किसी स्वाधीन देश के राजा की पराजय इतनी शांति से, इस तरह खून बहे बिना न हुई होगी। यह वह अहिंसा न थी, जिस पर देवगण प्रसन्न होते हैं।

(घ) आशा तो बड़ी चीज है, और फिर बच्चों की आशा ! उनकी कल्पना तो राई का पर्वत बना लेती है। हामिद के पाँव में जूते नहीं हैं, सिर पर एक पुरानी-धुरानी टोपी है, जिसका गोटा काला पड़ गया है, फिर भी वह प्रसन्न है। जब उसके अब्बाजान थैलियाँ और अम्मीजान नियामतें लेकर आयेंगी, तो वह दिल से अरमान निकाल लेगा। तब देखेगा, मोहसिन, नूरे और सम्मी कहाँ से उतने पैसे निकालेंगे। अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है। आज ईद का दिन, उसके घर में दाना नहीं! आज आबिद होता, तो क्या इसी तरह ईद आती ओर चली जाती! इस अंधकार और निराशा में वह डूबी जा रही है।

भाग-ख

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750-800 शब्दों में दीजिए।

(1) प्रेमचंद के नाटकों का परिचय दीजिए।

(2) सुमन की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

(3) 'ईदगाह' कहानी की कथावस्तु का विवेचन कीजिए।

भाग-ग

3. निम्नलिखित विषयों पर (प्रत्येक) लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :

(1) प्रेमचंद का जीवन परिचय

(2) 'पूस की रात' कहानी का सार

(3) 'पंच परमेश्वर' कहानी का प्रतिपा

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