IGNOU BSKC 106 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

BSKC 106 Solved Assignment
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BSKC 106: काव्यशास्त्र और साहित्यिक आलोचना

Title Name IGNOU BSKC 106 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree BACHELOR DEGREE PROGRAMMES
Course Code BASKH
Course Name Bachelor of Arts (Honours) Sanskrit
Subject Code BSKC 106
Subject Name काव्यशास्त्र और साहित्यिक आलोचना
Year 2025 2026
Session -
Language English Medium
Assignment Code BSKC 106/Assignment-1/2025 2026
Product Description Assignment of BASKH (Bachelor of Arts (Honours) Sanskrit) 2025 2026. Latest BSKC 106 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • January 2025 Session: 31st March, 2026
  • July 2025 Session: 30th September, 2025

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Included:

BSKC 106 2025 - Hindi

सत्रीय कार्य

बीएसकेसी-106

काव्यशास्त्र और साहित्यिक आलोचना

:बीएसकेसी-106

पात्रीय कार्य: BSKC-106/TMA/2025-26

पूर्णांक : 100

नोट-सभी प्रश्न अनिवार्य हैं:-

1. काव्यशास्त्र के अभिप्राय एवं स्वरूप पर प्रकाश डालें ।

अथवा

गद्यकाव्य के भेदों का विस्तार से वर्णन करें।

2. काव्यप्रकाश के अनुसार व्यंजन शब्दशक्ति का विवेचन करें।

अथवा

मम्मट के काव्य हेतु का विस्तार से वर्णन करें।

3. साहित्य दर्पण के अनुसार महाकाव्य का वर्णन करें ।

अथवा

मम्मट के अनुसार काव्यप्रायोजन को स्पष्ट करें ।

4. 'रससूत्र' का विवेचन करें ।

अथवा

अभिहितान्वयवाद का वर्णन करें

5. अर्थान्तरन्यास अथवा उग्रेक्षा अलंकार का लक्षण बताते हुए उदारण को स्पष्ट कीजिए। 10

6. निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा अलंकार है लक्षण बताते हुए स्पष्ट कीजिए।

कमलमनांभसि कमलेच कुयालयेतानि कनकलतिकायम्।

सा च सुकुमात्सुभगेत्युतयत्परमपरा केयम्।।

ज्योत्स्नाभस्मन्चूराणध्वलाविक्षति तारकास्थि-

न्यान्तर्धानव्यासनरसिका रात्रिकापालिकीयन्।

ह्यपाद द्वीपं भ्रमति दधाति चन्द्रमुदकपाले

न्यस्तं सिद्धाञ्जनपरिमलं लांछनस्य चलेन।।

7. आर्या अथवा मालिनी छंद का लक्षण देते हुए उसके उदाहरण श्लोक का स्पष्टीकरण लिखिए। 10

निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा छंद है उसका लक्षण बताते हुए स्पष्टीकरण दीजिए

अर्थों हि कन्या परकीए एव।

तमथ संप्रेष्य परिच्छितः।

जातो ममायं विषदः प्रकामम्।

प्रत्यर्पितन्यास इयन्तरात्मा।।

अथवा

पातुं न प्रथमं ब्यस्याति जलं युस्मात्स्वपीतेषु वा

आओ वः कुसुमप्रसूतिसमये यत्या भवत्योत्सवः

नादत्ते प्रियमन्दनाऽपि भवतां स्नेहेन या पल्लवम्।

सेयं याति शकुंतला पतिगृहं सर्वैन्नुज्ञायताम्।।


BSKC 106 (January 2025 - July 2025) - HINDI

सत्रीय कार्य

बीएसकेसी-106

काव्यशास्त्र और साहित्यिक आलोचना

पाठ्यक्रम कोड: BSKC-106

पाठ्यक्रम शीर्षक:

सत्रीय कार्य: BSKC-106/TMA/2025-26

पूर्णांक : 100

नोट- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं-

1. काव्यशास्त्र के अभिप्राय एवं स्वरुप पर प्रकाश डालें ।

अथवा

गद्यकाव्य के भेदों का विस्तार से वर्णन करें।

2. काव्यप्रकाश के अनुसार व्यंजन शब्दशक्ति का विशद विवेचन क

अथवा

मम्मट के काव्य हेतु का विस्तार से वर्णन करें।

3.साहित्य दर्पण के अनुसार महाकाव्य का वर्णन करें ।

अथवा

मम्मट के अनुसार काव्यप्रयोजन को स्पष्ट करें ।

4. 'स्ससूत्र' का विवेचन करें ।

अथवा

अभिहितान्वयवाद का वर्णन करें

5. अर्थान्तरन्यास अथवा उत्प्रेक्षा अलंकार का लक्षण बताते हुए उदारण को स्पष्ट कीजिए।

6.निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा अलंकार है लक्षण बताते हुए स्पष्ट कीजिए।

कमलमनंभसि कमलेच कुवलयेतानि कनकलतिकायम्।

सा च सुकुमारसुभगेत्युत्पत्परम्परा केयम्।।

अथवा

 ज्योत्सनाभस्ममच्छुरंधवलाविभ्रतीतारकास्थि-

न्यान्तर्धनव्यसनरसिका रात्रिकापालिकीयम्।

द्वीप द्वीपं ब्रह्माति दधाति चन्द्रमुद्रकपाले

न्यास्तं सिद्धाञ्जनपरिमलं लांछनस्य चलेन।।

7.आर्या अथवा मालिनी छंद का लक्षण देते हुए उसके उदाहरण श्लोक का स्पष्टीकरण लिखिए।

8. निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा छंद है उसका लक्षण बताते हुए स्पष्टीकरण दीजिएः

 

अर्थो हि कन्या परकीए एव।

तामद्य संप्रेष्य परिग्रहीतः।

जातो ममायं विषदः प्रकामम्।

प्रत्यर्पितन्यास इवान्सतारात्मा।।

अथवा

पातुं न प्रथमं ब्यस्यति जलं युष्मस्वपीतेषु या

नादत्ते प्रियमन्दनाऽपि भवतां स्नेहेन या पल्लवम्।

एते वः कुसुमप्रसूतिसमये यस्या भवत्योत्सवः

सेयं याति शकुंतला पतिगृहं सर्वैन्नुज्ञायताम्।।

 

 

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