IGNOU BSKS 191 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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BSKS 191: भारतीय वास्तुकला प्रणाली
| Title Name | IGNOU BSKS 191 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | BACHELOR DEGREE PROGRAMMES |
| Course Code | BSKH |
| Course Name | Bachelor of Arts (Honours) Sanskrit |
| Subject Code | BSKS 191 |
| Subject Name | भारतीय वास्तुकला प्रणाली |
| Year | 2026 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | BSKS 191/Assignment-1/2026 |
| Product Description | Assignment of BSKH (Bachelor of Arts (Honours) Sanskrit) 2026. Latest BSKS 191 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2026 Session: 31st March, 2026
- July 2026 Session: 30th September, 2026
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📋 Assignment Content Preview
BSKS 191 2025 2026 - Hindi
सत्रीय कार्य : BSKS - 191 भारतीय वास्तुकला प्रणाली
पाठ्यक्रम कोड BSKS - 191
पाठ्यक्रम शीर्षक: भारतीय वास्तुकला प्रणाली
सत्रीय कार्य : BSKS-191/TMA/2025-26
संख्या: 100
नोट - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : -
(क) व्याख्या आधारित प्रश्न : -
1. अधोलिखित श्लोकों में से किन्ही तीन श्लोकों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: -
(अ) निरूपयामो विदुषां संतुष्ट्यै वास्तुनिर्णयम् ।
यथामति धनारोग्यसौख्यंकीर्तिविवृद्धये ।।
(ब) प्रागुत्तरोन्नते धनसुतक्षयः सुतवधश्च दुर्गन्धे ।
वक्रे बन्धुविनाशो न सन्ति गर्भाश्च दिङ्मूढे ।।
(स) सम्पाता वंशानां मध्यानि समानि यानि च पदानाम् ।
तानि मर्माणि विद्यान्न तानि परिपीडयेत् प्राज्ञः।।
(द) नन्द्यावर्तमलिन्दैः शालाकुड्यात प्रदक्षिणान्तगतैः ।
द्वारं पश्चिममस्मिन् विहाय शेषाणि कार्याणि ।।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए :-
1. द्वारवेधफलों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
2. प्रश्नाक्षर के द्वारा भूमि में शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
3. गृहारम्भ में खात विचार का स्पष्ट विवेचन कीजिए ।
4. कार्य के अनुसार गृह में दिक्स्थाननिर्णय का वर्णन कीजिए।
(ग) निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिएः -
(i) चतुष्षष्टिपदवास्तुमण्डल
(ii) द्विशालगृह
(iii) राजगृहप्रमाण
(iv) कलश चक्र विचार
(v) वीथिका प्रमाण
BSKS 191 (January 2026 - July 2026) - SANSKRIT
सत्रीय कार्य : BSKS – 191 भारतीय वास्तुकला प्रणाली
पाठ्यक्रम कोड BSKS – 191
पाठ्यक्रम शीर्षक : भारतीय वास्तुकला प्रणाली
सत्रीय कार्य : BSKS – 191/TMA/2026
पूर्णांक : 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : -
(क) अधोलिखित श्लोकों में से किन्ही तीन श्लोकों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: - 15X3=45
(1) परगेहकृताः सर्वाः श्रौतस्मार्तक्रियाः शुभाः ।
निष्फलाः स्युर्यतस्तासां भूमीशः फलमश्नुते ॥
(2) जलान्तं प्रस्तरान्तं वा पुरुषान्तमथापि वा ।
क्षेत्रं संशोध्य वोद्धृत्य शल्यं सदनमारभेत् ॥
(3) मूलद्वारं नान्यैर्द्वारैरभिसन्दधीत रूपद्वर्य्या ।
घट-फल-पत्र-प्रथमादिभिश्च तन्मङ्गलैश्चिनुयात् ॥
(4) नन्द्यावर्तमलिन्दैः शालाकुड्यात् प्रदक्षिणान्तगतैः ।
द्वारं पश्चिममस्मिन् विहाय शेषाणि कार्याणि ॥
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : -
1. वास्तुशास्त्र की आचार्य परम्परा का वर्णन कीजिए ।
2. भूमि-परीक्षण की किन्हीं दो विधियों का उल्लेख कीजिए ।
3. शकुन के द्वारा भूमि में शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए ।
4. द्वारवेधफलों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
(ग) निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए: - 5X5=25
(i) राहु मुख पुच्छ विचार (ii) त्रिशालवास्तु (iii) मर्मस्थान
(iv) वास्तु-प्रयोजन (v) आयादि शुद्धि विचार
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
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