IGNOU CBKG 1 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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CBKG 1: भारतीय एवं वैश्विक परिप्रेक्षय में काल-चिन्तन
| Title Name | IGNOU CBKG 1 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | CERTIFICATE PROGRAMMES |
| Course Code | CBKG |
| Course Name | भारतीय कालगणना में प्रमाण पत्र |
| Subject Code | CBKG 1 |
| Subject Name | भारतीय एवं वैश्विक परिप्रेक्षय में काल-चिन्तन |
| Year | 2026 2027 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | CBKG 1/Assignment-1/2026 2027 |
| Product Description | Assignment of CBKG (भारतीय कालगणना में प्रमाण पत्र) 2026 2027. Latest CBKG 001 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2025 Session: 30th September, 2025
- July 2025 Session: 30th April, 2025
- January 2026 Session: 30th April, 2026
- July 2026 Session: 30th November, 2026
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CBKG 1 2025 - Hindi
सत्रीय कार्य : CBKG-001
भारतीय एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में काल चिंतन
सत्रीय कार्य - CBKG-001/TMA/2025-26
नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।
1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
25 x 2 = 50
1.1 वैदिक उद्धरणों के आधार पर काल सम्बन्धी भारतीय अवधारणा को स्पष्ट करें।
1.2 भारतीय दर्शन, पौराणिक साहित्य और काल की अवधारणा में क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं?
1.3 जैन और बौद्ध साहित्य में काल की अवधारणा और वैदिक साहित्य के बीच साम्यता और भिन्नता पर चर्चा करें।
1.4 चक्रीय और एकरैखिक काल की अवधारणाओं को समझाएं और उनके ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संदर्भ पर प्रकाश डालें।
2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
15 x 2 = 30
2.1 सृष्टि रचना के भारतीय मत और आधुनिक पाश्चात्य मत में काल की अवधारणा की क्या भूमिका है?
2.2 ग्रहों की भारतीय परिभाषा और उनके आधार की व्याख्या करें।
2.3 पृथ्वी की गति के प्रकारों का विवेचन करें और उनके कालगणना पर प्रभाव को समझाएं।
2.4 सूर्य की परिभ्रमण और संक्रान्तियों के बीच संबंध पर विस्तृत जानकारी दें।
2.5 भारतीय कालगणना में नक्षत्रों और राशियों के योगदान का विवेचन करें।
3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
5 x 4 = 20
3.1 पुराणों में काल के स्वरूप और उसकी परिभाषा का उल्लेख करें।
3.2 दिन और रात के बराबर होने की स्थिति को किस ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर समझा जा सकता है?
3.3 पृथ्वी की गति और उसके कालगणना पर प्रभाव को संक्षिप्त में समझाएं।
3.4 काल शब्द का प्रयोग वेदों में कब और कहाँ किया गया है, इसका संक्षिप्त विश्लेषण करें।
3.5 कौन सा दर्शन काल को वस्तु के रूप में मानता है? इसके बारे में संक्षेप में बताएं।
3.6 जैनमत में कितने प्रकार के पदार्थ माने गए हैं?
3.7 नौ ग्रहों में छाया ग्रहों की पहचान और उनकी भूमिका पर विचार करें।
3.8 'कल्' धातु का अर्थ और उसकी काल-निर्धारण में भूमिका पर चर्चा करें।
CBKG 001 (January 2025 - July 2025) - HINDI
सत्रीय कार्य: CBKG-001 भारतीय एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में काल चिंतन
सत्रीय कार्य - CBKG-001/TMA/2025-26
नोट - इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
पूर्णांक - 100
1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
1.1 वैदिक उद्धरणों के आधार पर काल सम्बन्धी भारतीय अवधारणा को स्पष्ट करें।
1.2 भारतीय दर्शन, पौराणिक साहित्य और काल की अवधारणा में क्या समानताएँ और भिन्नताएँ हैं?
1.3 जैन और बौद्ध साहित्य में काल की अवधारणा और वैदिक साहित्य के बीच साम्यता और भिन्नता पर चर्चा करें।
1.4 चक्रीय और एकरैखिक काल की अवधारणाओं को समझाएं और उनके ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संदर्भ पर प्रकाश डालें।
2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
2.1 सृष्टि रचना के भारतीय मत और आधुनिक पाश्चात्य मत में काल की अवधारणा की क्या भूमिका है?
2.2 ग्रहों की भारतीय परिभाषा और उनके आधार की व्याख्या करें।
2.3 पृथ्वी की गति के प्रकारों का विवेचन करें और उनके कालगणना पर प्रभाव को समझाएं।
2.4 सूर्य की परिभ्रमण और संक्रान्तियों के बीच संबंध पर विस्तृत जानकारी दें।
2.5 भारतीय कालगणना में नक्षत्रों और राशियों के योगदान का विवेचन करें।
3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
3.1 पुराणों में काल के स्वरूप और उसकी परिभाषा का उल्लेख करें।
3.2 दिन और रात के बराबर होने की स्थिति को किस ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर समझा जा सकता है?
3.3 पृथ्वी की गति और उसके कालगणना पर प्रभाव को संक्षिप्त में समझाएं।
3.4 काल शब्द का प्रयोग वेदों में कब और कहाँ किया गया है, इसका संक्षिप्त विश्लेषण करें।
3.5 कौन सा दर्शन काल को वस्तु के रूप में मानता है? इसके बारे में संक्षेप में बताएं।
3.6 जैनमत में कितने प्रकार के पदार्थ माने गए हैं?
3.7 नौ ग्रहों में छाया ग्रहों की पहचान और उनकी भूमिका पर विचार करें।
3.8 'कल्' धातु का अर्थ और उसकी काल-निर्धारण में भूमिका पर चर्चा करें।
CBKG 001 (January 2026 - July 2026) - HINDI
सत्रीय कार्य : CBKG-001
भारतीय एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में काल चिंतन
सत्रीय कार्य – CBKG-001/TMA/2026-27 पूर्णांक - 100
नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।
1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 500 शब्दों में) दीजिए ।
i) भारतीय दर्शन ग्रन्थों में काल की सत्ता और स्वरूप पर हुए विचारों का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
ii) काल की अवधारणा में भारतीय दर्शन से लेकर पौराणिक साहित्य तक क्या समानता पाई जाती है? उदाहरणों के साथ विवेचना करें।
iii) पौराणिक, जैन एवं बौद्ध परम्पराओं में काल की अवधारणा किस प्रकार वैदिक चिंतन का विस्तार या पुनर्व्याख्या है? दार्शनिक आधार स्पष्ट कीजिए।
iv) सेमेटिक मतों तथा आधुनिक विज्ञान में काल की अवधारणा का परिचय देते हुए भारतीय काल-चिंतन से उसकी मूलभूत भिन्नताओं का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
v) सृष्टि-रचना की भारतीय अवधारणा के आलोक में काल के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए तथा बताइए कि सृष्टि-चिंतन काल-गणना की नींव कैसे बनता है।
vi) भारतीय परम्परा में भूमण्डल-केन्द्रित दृष्टिकोण का आधार क्या है? सौरमण्डल, भू-भ्रम और काल-निर्धारण के परस्पर सम्बन्ध का विश्लेषण कीजिए।
2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
i) भारतीय परम्परा में ‘सृष्टि’ और ‘प्रलय’ की अवधारणाएँ काल-बोध को कैसे प्रभावित करती हैं?
ii) ग्रहों की भारतीय परिभाषा और उनके आधार की व्याख्या करें।
iii) भू-भ्रम की विभिन्न गतियाँ (दैनिक, वार्षिक, अयनांत, सम्पात) काल-गणना का आधार क्यों हैं?
iv) सूर्य के परिभ्रमण से क्या तात्पर्य है? सूर्य संक्रान्तियों का ऋतुओं से क्या सम्बन्ध है?
v) ज्योतिष का क्या अर्थ है?
vi) राशि और नक्षत्र की अवधारणा को काल-विज्ञान के रूप में कैसे समझा जा सकता है?
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