IGNOU CBKG 3 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

CBKG 3 Solved Assignment
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CBKG 3: भारतीय तथा विश्व के विभिन्न कैलेण्डर

Title Name IGNOU CBKG 3 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree CERTIFICATE PROGRAMMES
Course Code CBKG
Course Name भारतीय कालगणना में प्रमाण पत्र
Subject Code CBKG 3
Subject Name भारतीय तथा विश्व के विभिन्न कैलेण्डर
Year 2026 2027
Session -
Language English Medium
Assignment Code CBKG 3/Assignment-1/2026 2027
Product Description Assignment of CBKG (भारतीय कालगणना में प्रमाण पत्र) 2026 2027. Latest CBKG 003 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • January 2026 Session: 30th April, 2026
  • July 2026 Session: 30th November, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
Scoring: Designed to help students achieve 90+ marks.
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Included:

CBKG 3 2025 - Hindi

सत्रीय कार्य : CBKG-003

भारतीय तथा विश्व के विभिन्न कैलेण्डर

सत्रीय कार्य - CBKG-003/TMA/2025-26

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।

1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

25 x 2 = 50

1.1 भारतीय कालगणना की अवधारणा को स्पष्ट करें और इसके प्रमुख प्रकारों (सौर, चंद्र, और मिश्रित) का विस्तार से वर्णन करें।

1.2 भारतीय पञ्चांग के पाँच अंगों के बारे में विस्तार से समझाइए। इसके अलावा, पञ्चांग में दो तिथियों के एक साथ पड़ने का कारण स्पष्ट करें।

1.3 विभिन्न संस्कृतियों के कैलेण्डर के महत्व और उपयोग का तुलनात्मक विश्लेषण करें (जैसे हिंदू, इस्लामी, ईसाई और यहूदी कैलेंडर) ।

1.4 विश्व के प्रमुख कैलेण्डरों का इतिहास क्या है? इनमें से प्रमुख कैलेण्डर (जैसे, हिजरी, जूलियन, ग्रिगोरियन) की उत्पत्ति और विकास पर प्रकाश डालें।

2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

15 x 2 = 30

2.1 कैलेंडर सुधार समिति की स्थापना क्यों की गई थी? इसके प्रभाव और भारतीय समाज पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करें।

2.2 भारतीय और पश्चिमी कालगणना प्रणालियों के बीच अंतर पर चर्चा करें। विशेष रूप से, भारतीय कालगणना में प्रमुख पर्वों और तिथियों की विशेषताएँ और महत्व पर विचार करें।

2.3 ग्रिगोरियन कैलेंडर की उत्पत्ति और विकास यात्रा पर संक्षेप में चर्चा करें।

2.4 आयुर्वेद में कालगणना के उपयोग पर विचार करें।

3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए ।

4 x 5 = 20

3.1 भारतीय कालगणना में "अयन" का क्या अर्थ है? इसके उपयोग और महत्व को समझाइए ।

3.2 जूलियन और ग्रिगोरियन कैलेंडर में मुख्य अंतर क्या है?

3.3 कैलेंडर से जुड़ी प्रमुख घटनाओं (जैसे, सौर ग्रहण, चंद्र ग्रहण, आदि) के प्रभाव पर प्रकाश डालें।

3.4 आयनिक गति क्या है? इसे कालगणना में कैसे लागू किया जाता है?

3.5 माया कैलेंडर और भारतीय कालगणना में समानताएँ और अंतर पर चर्चा करें।

3.6 इंग्लैंड में कैलेण्डर अधिनियम की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके प्रभाव पर विचार करें।


CBKG 003 (January 2026 - July 2026) - HINDI

सत्रीय कार्य : CBKG-003

भारतीय तथा विश्व के विभिन्न कैलेण्डर

सत्रीय कार्य – CBKG-003/TMA/2026-27 

 पूर्णांक - 100

नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।

1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए । 

i. भारतीय पंचांग परम्परा को 'कैलेण्डर' न मानकर 'काल-विज्ञान की प्रणाली' के रूप में सिद्ध कीजिए। नवविध कालमान और वर्ष-समन्वय के आधार पर विवेचन कीजिए।

ii. भारतीय नववर्ष परम्पराओं की विविधता का अध्ययन करते हुए स्पष्ट करें कि विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न नववर्ष होने के बावजूद कालगणना की मूल संरचना एक कैसे है।

iii. कैलेण्डर समिति और शक संवत् के सन्दर्भ में यह स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक भारत में कैलेण्डर सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे कौन से वैज्ञानिक व राष्ट्रीय उद्देश्य थे।

iv. रोमन से ग्रेगोरियन कैलेण्डर तक की विकास-यात्रा को उदाहरण बनाकर समझाइए कि कैलेण्डर सुधार इतिहास में एक वैज्ञानिक अनिवार्यता कैसे बनता है।

v. विश्व के प्रमुख कैलेण्डरों (जैसे माया, चीन, मिश्र, ग्रीक) का उद्भव और विकास स्पष्ट कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि इनमें भारतीय कालगणना का क्या प्रभाव रहा।

2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

i. भारतीय पंचांग में चान्द्र-सौर समन्वय क्यों आवश्यक है?

ii. लू-पंचांग किस प्रकार का कैलेण्डर है और इसका उपयोग कहाँ होता है?

iii. ‘कैलेण्डर’ शब्द का शाब्दिक और वैज्ञानिक अर्थ क्या है?

iv. ग्रेगोरियन कैलेण्डर और हिजरी कैलेण्डर में मुख्य अंतर संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।

v. कैलेण्डर सुधार समिति के गठन का उद्देश्य क्या था और इसका भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

vi. 1750 का कैलेण्डर अधिनियम क्यों ऐतिहासिक माना जाता है?

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