IGNOU EHD 2 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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EHD 2: Hindi Kavya
| Title Name | IGNOU EHD 2 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | BACHELOR DEGREE PROGRAMMES |
| Course Code | BDP |
| Course Name | Bachelor Degree Programmes |
| Subject Code | EHD 2 |
| Subject Name | Hindi Kavya |
| Year | 2025 2026 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | EHD 2/Assignment-1/2025 2026 |
| Product Description | Assignment of BDP (Bachelor Degree Programmes) 2025 2026. Latest EHD 2 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
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EHD 2 2025 2026 - Hindi
हिंदी में ऐच्छिक पाठ्यक्रम हिंदी काव्य
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम : बी.डी.पी / ई.एच.डी-02
सत्रीय कार्य कोड: ई.एच.डी-02/टी.एम.ए/2025-2026
पूर्णांकः 100
नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
(क) बूझत स्याम कौन तू गोरी।
मौसी कहाँ रहती है बेटी, मैंने तो ब्रज खोरी नहीं देखी। क्योंकि हम ब्रज-तन आवर्ती, बजाते अपनी पौरी। सुनत रहरति स्त्रावनि नंद दोता, करत फिरत मखंडधि छोरी। हम तुम्हारे चारों को कहाँ ले जायेंगे, आओ मिलकर खेलें। सूरदास प्रभु रसिक (-)सिरमनि बतानि मुरह राधिका भोरी।
(ख) जाके प्रिय न राम वैदेही।
से छड़िए कोटि बैरी समजदपि परम सनेही। तज्यो पिता प्रहलाद विभीषण बंधु भरत महतारी। बलि गुरु तज्यों कंत ब्रज वनतनि भये जग मंगलकारी। नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसंव्य जहाँ लों। अंजन कहा आंखि तेहि फूट बहुतक कहाँ कहाँ लो। तुलसी सो सब भांति परम हित पूज्य प्राण ते प्यारो। जासों होय सनेह राम पद ये तो मतो हमारो।
(ग) रहिमन पानी बिन राखिए सब सून। पानी गये न ऊबे मोती मन चून।
(घ) हिमाद्री तुंग श्रृंग से
प्रबुद्ध शुद्ध भारत आत्म-तेज उज्ज्वल स्वतंत्रता आह्वान अमर वीर पुत्र, दृढ़-प्रतिज्ञा सोच, असंख्य यश-किरणें बिखरी दिव्य जलती हुई मातृभूमि के पुत्रों की तरह रुको मत करो वीर साहसी मत करो। आरती सैन्य-सिंधु में-सुवद्वा की अग्नि से जलो, निपुण बनो-बढ़ो, बढ़ो, बढ़ो।
2. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए:
आदिकाव्य की प्रतिनिधि रचनाओं पर विस्तार से चर्चा कीजिए। (क)
(ख) तुलसीदास की कविता के भाव-पक्ष पर विचार कीजिए।
(ग) घनानंद के काव्य में निरुपित प्रेम भाव पर अपना पक्ष रखिए।
( घ) प्रगतिवाद की अन्तर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।
(ड.) नई कविता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
3. निम्नलिखित में से प्रत्येक पर लगभग 300 सब्दों में टिप्पणी लिखिए:
(क) निराला का रचना-विधान
(ख) कुरुक्षेत्र का प्रतिपाद्य
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