IGNOU MAHV MHD 2 SOLVED ASSIGNMENT

MHD 2 Solved Assignment
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MHD 2: Adhunik Hindi Kavya

Title Name IGNOU MAHV MHD 2 SOLVED ASSIGNMENT
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree MASTER DEGREE PROGRAMMES
Course Code MAHV
Course Name एम.ए. (हिंदी व्यावसायिक लेखन)
Subject Code MHD 2
Subject Name Adhunik Hindi Kavya
Year 2025
Session -
Language English Medium
Assignment Code MHD 2/Assignment-1/2025
Product Description Assignment of MAHV (एम.ए. (हिंदी व्यावसायिक लेखन)) 2025. Latest एम.एच.डी..-02 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • July 2025 Session: 31st March, 2026
  • January 2026 Session: 30th September, 2026
  • July 2025 Session: 31st March, 2026
  • January 2026 Session: 30th September, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
Scoring: Designed to help students achieve 90+ marks.
📋 Assignment Content Preview
Included:

FHD 02 (July 2025 - January 2026) - HINDI

सत्रीय कार्य

(खंड 1 से 4 पर आधारित)

पाठ्यक्रम कोड: एफ.एच.डी.-02

सत्रीय कार्य कोड : एफ.एच.डी. -02/टी.एम.ए./जुलाई 2025-जनवरी 202

कुल अंक- 100

खंड-'क'

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

(क) सम्प्रेषण की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए। 

(অ) 15 राहुल सांकृत्यायन के यात्रा वृतांत पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

(ग) अपने क्षेत्र के किसी सरकारी अस्पताल की स्थिति के बारे में संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट के लिए निम्नलिखित तथ्यों से सहायता ले सकते हैं-

1) आसपास के गांवों के लिए अस्पताल

2) दो डाक्टर और दो नर्से

3) मरीजों की भीड़

4) दवाइयों का अभाव

(घ) सरकारी पत्र का एक नमूना प्रस्तुत कीजिए।

खंड-'ख'

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150-200 शब्दों में दीजिए।

(क) सामाजिक आदान-प्रदान के विभिन्न रूपों का उल्लेख कीजिए।

(ब) किसी भी एक विधा की रचना के लेखन का एक नमूना प्रस्तुत कीजिए।

(ग) पत्र विधा के रूप में मुक्तिबोध के पत्रों का विश्लेषण कीजिए। :

6 (घ) दृश्य माध्यमों की भाषा पर प्रकाश डालिए।

खंड-'ग'

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क) वैयक्तिक लेखन के रूप में 'आत्मकथा' की भाषा को उदाहरण सहित समझाइए। 

(ख) 'निराला की साहित्य साधना' का प्रतिपाद्य लिखिए। 

(ग) प्रोक्ति की संकल्पना को उदाहरण सहित समझाइए।

(घ) आपका मित्र गाड़ी चलाने का लाइसेन्स बनवाना चाहता है। उसे इस संबंध में आवश्यक निर्देश देते हुए लाइसेन्स बनवाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। 

(ड.) "भाषा सूचना के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है।" इस कथन पर विचार कीजिए।

(च) "हिंसा बुरी चीज है, पर दासता उससे भी बुरी है। इस सूक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।

 


MHD 02 (July 2025 - January 2026) - HINDI

एम.एच.डी.-02 : आधुनिक हिंदी काव्य सत्रीय कार्य 2025-26

पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.-02

सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी. -02/टी.एम.ए./2025-26

अंक

सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

1. मैथिलीशरण गुप्त की कविता में राष्ट्रीयता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

2. साकेत लिखने की प्रेरणा गुप्त जी को कहाँ से प्राप्त हुई है? यह काव्य किस श्रेणी का है इसका औचित्य को सिद्ध किजिए।

3. "निराला राग और विराग के कवि हैं" इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

4. प्रसाद की काव्य भाषा का वैशिष्ट्य बताइए।

5. निम्नलिखित गद्यांश को सप्रसंग व्याख्या कीजिए 

(क) हा ! हा ! भारत दुर्दशा न देखी जाई।

अंगरेज राज सुख साज सजे सब भारी।

पै धन बिदेस चलि जात इहै अति ख्वारी। ताहू पै महंगी काल रोग विस्तारी।

दिन-दिन दूनो दुख ईसश् देत हा हारी।।

सबके ऊपर टिक्क्सश की आफत आई।

हा ! हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई।

(ख) हे साधुओ ! सोये बहुत, अब ईश्वराराधन करो,

उपदेश द्वारा देश का कल्याण कुछ साधन करो।

डूबे रहोगे और कब तक हाय ! तुम अज्ञान में?

चाहो तुम्हीं तो देश की काया पलट दौ आन में।।

थे साधु तुलसीदास, नानक, रामदास समर्थ भी

व्यवहृत यही पद हो रहा है आज उनके अर्थ भी।

पर वे न होकर भी यहाँ उपकार सबका कर रहे,

सदभाव उनके ग्रन्थ सबके मानसों में भर रहे

(ग) नील परिधान बीच सुकुमार खुल

रहा मृदुल अधखुला अंग

खिला हो ज्यों बिजली का फूल

मेघ-बन बीच गुलाबी रंग।

आह ! वह मुख ! पश्चिम के व्योम

बीच जब घिरते हों घन श्याम

अरुण रवि मंडल उनको भेद

दिखाई देता हो छविधाम । -

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