IGNOU MHD 10 SOLVED ASSIGNMENT HINDI

MHD 10 Solved Assignment
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MHD 10: प्रेमचंद की कहानियाँ

Title Name IGNOU MHD 10 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
Type Soft Copy (E-Assignment) .pdf
University IGNOU
Degree MASTER DEGREE PROGRAMMES
Course Code MHD
Course Name Master of Arts in Hindi
Subject Code MHD 10
Subject Name प्रेमचंद की कहानियाँ
Year 2025 2026
Session -
Language English Medium
Assignment Code MHD 10/Assignment-1/2025 2026
Product Description Assignment of MHD (Master of Arts in Hindi) 2025 2026. Latest MHD 10 2026 Solved Assignment Solutions
Last Date of IGNOU Assignment Submission Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam).

Semester Wise
January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam).
July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam).
FormatReady-to-Print PDF (.soft copy)

📅 Important Submission Dates

  • July 2025 Session: 31st March, 2026
  • January 2026 Session: 31st October, 2026

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Accuracy: Solved by IGNOU subject experts.
Guidelines: Strictly follows 2025-26 official word limits.
Scoring: Designed to help students achieve 90+ marks.
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Included:

MHD 10 (July 2025 - January 2026) - HINDI

एम.एच.डी.-10

प्रेमचंद की कहानियाँ सत्रीय कार्य (सभी खंडों पर आधारित)

पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.-10 सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.-10/टी.एम.ए./2025-2028 कुल अंक : 100

सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिएः

(क) रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी- हाय! कितनी निर्दय हूँ। जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान् मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए; परंतु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाये, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो, यह वृद्ध असहाय है।

(ख) वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया; किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गए कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा-प्रार्थना की चेष्टा नहीं की; वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असह्य-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनीं तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सद्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर।

(ग) स्त्रियाँ गा रही थीं, बालक उछल रहे थे। और पुरुष अपने अँगोछों से यात्रियों को हवा कर रहे थे। इस समारोह में नोहरी की ओर किसी का ध्यान न गया, वह अपनी लठिया पकड़े सब के पीछे सजीव आशीर्वाद बनी खड़ी थी। उसकी आँखे डबडबायी हुई थीं, मुख से गौरव की ऐसी झलक आ रही थी मानों वह कोई रानी है, मानों यह सारा गाँव उसका है, वे सभी युवक उसके बालक हैं। अपने मन में उसने ऐसी शक्ति, ऐसे विकास, ऐसे उत्थान का अनुभव कभी न किया था।

2. प्रेमचंद के स्त्री संबंधी दृष्टिकोण पर विचार कीजिए।

3. प्रेमचंद की कहानी कला पर विचार कीजिए।

4. विध्वंस कहानी का विश्लेषण करते हुए उसका मंतव्य स्पष्ट कीजिए।

5. स्वाधीनता आंदोलन के संदर्भ में 'जुलूस' कहानी का विवेचन कीजिए।

6. 'सवासेर गेहूँ' कहानी का विश्लेषण और मूल्यांकन कीजिए।

❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
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