IGNOU MTT 41 SOLVED ASSIGNMENT HINDI
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MTT 41: Sindhi-Hindi translation: Tulna Aur Punah Srijan
| Title Name | IGNOU MTT 41 SOLVED ASSIGNMENT HINDI |
|---|---|
| Type | Soft Copy (E-Assignment) .pdf |
| University | IGNOU |
| Degree | PG DIPLOMA PROGRAMMES |
| Course Code | PGDSHST |
| Course Name | Post Graduate Diploma in Sindhi-Hindi-Sindhi Translation |
| Subject Code | MTT 41 |
| Subject Name | Sindhi-Hindi translation: Tulna Aur Punah Srijan |
| Year | 2025 |
| Session | - |
| Language | English Medium |
| Assignment Code | MTT 41/Assignment-1/2025 |
| Product Description | Assignment of PGDSHST (Post Graduate Diploma in Sindhi-Hindi-Sindhi Translation) 2025. Latest MTT 041 2026 Solved Assignment Solutions |
| Last Date of IGNOU Assignment Submission | Last Date of Submission of IGNOU BEGC-131 (BAG) 2025-26 Assignment is for January 2026 Session: 30th September, 2026 (for December 2025 Term End Exam). Semester Wise January 2025 Session: 30th March, 2026 (for June 2026 Term End Exam). July 2025 Session: 30th September, 2025 (for December 2025 Term End Exam). |
| Format | Ready-to-Print PDF (.soft copy) |
📅 Important Submission Dates
- January 2025 Session: 31st March, 2026
- July 2025 Session: 30th September, 2025
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MTT 041 (January 2025 - July 2025) - HINDI
सिंधी-हिंदी अनुवाद : तुलना और पुनःसृजन (एम.टी.टी.-041) (जनवरी 2025 और जुलाई 2025 सत्रों के लिए)
कार्यक्रम कोड: पी.जी.डी.एस.एच.एस.टी. पाठ्यक्रम कोड: एम.टी.टी.-041
सत्रीय कार्य: एम.टी.टी.-041/एएसटी/(टी.एम.ए)/2025
अधिकतम अंक 100
1. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 300-300 शब्दों में दीजिए :
(क) सिंधी और हिंदी की लिंग व्यवस्था की तुलना कीजिए।
(ख) सिंधी भाषा और साहित्य पर संस्कृत की परंपरा के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
2. निम्नलिखित सिंधी शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए :
1 आंडो 8 तंगी 15 मोचिड़ो
2 आहिस्ते 9 नीहुं 16 लबाड़
3 उथणु 10 पलउ 17 वहिदत
4 कतणु 11 अलभु 18 वेरी
5 कोडियो 12 फरेबू 19 सघ
6 घुंजु 13 बाझारो 20 हिरासु
7 टपाली 14 मिस्कीनु
3. निम्नलिखित हिंदी शब्दों के सिंधी पर्याय लिखिए :
1 अपच 8 दौर 15 मरोरथ
2 आदि 9 न 16 मंथन
3 करुण 10 नैन 17 राउ
4 कौड़ी 11 परिश्रम 18 लोभी
5 चकित 12 पहाड़ा 19 शिखर
6 जेब 13 पैराकार 20 साबुत
7 टीपना 14 बदन
4. निम्नलिखित सिंधी वाक्यों का हिंदी में अनुवाद कीजिए :
1. तव्हां कहिड़े विषय में डिग्री हासिल कई आहे?
2. तव्हां जे पुट/धीउ जो नालो बुधायो।
3. विमला घर जो कम करे आई आहे।
4. गोपालदास जो पुटु दुबईअ में कमाईंदो आहे।
5. राकेश फिकि चाहीं पियांदो आहे।
6. रेखा मोहिनी जी पाकी साहेड़ी आहे।
7. शांता अजु बेसन जी भाजी थाही आहे।
8. मां रोज़ सुबुह जो पंधु करण वेदों आहियां।
9. किशनी ऑफीस में नौकरी कंदी आहे।
10. गिदवाणी शाम जो पंजे बजे असांजे घरु ईंदो।
11. मोहनदास जे पुट जी शादी होटल में आहे।
12. राधा मिठे आवाज़ में गाईंदी आहे।
13. अजु असां जे कॉलेज में क्रिकेट चटभेटी आहे.
14. असां जे स्कूल में शाम जो सिंधी भाषा सेखारण जा क्लास हली रहिया आहिनि।
15. राकेश कथक नृत्य सिखाओ है।
16. अजु असां सर्कस डिसां वेंदासीं।
17. सदाइ साधो खाधो खैणु घुरिजे।।17।।
18. अजु मंदर में भागवत कथा थींदी।
19. आर्तवार दीन्हौं असां दिल्लीआ वेंदासीं।
20. माधव जाइमाथान सुमेर खां सूर्यास्त थिंदा।
5. (क) निम्नलिखित मुहावरों / लोकोक्तियों का आशय हिंदी में स्पष्ट कीजिए :
1. आई टांडे खे बोरचियाणी थी वेठी।
2. घणे खाधे घणी बुख।
3. जेसीं सास तेसीं आस।
4. जेको अध खे छडे सजीअ पुठियां डुके, सो अध खां बि वजे ।
5. धकु हणु धीअ खे त सिखे नूंहं।
6. बदन में दमु न ठहे नालो जोरावर खान।
7. ब भाउर टियों लेखो।
8. भाणु त खेती न त कोरी रेती।
9. मऊ जनंदी पुतिदा, भागु न दंडी वंदे।
10. जेडो काइदो, ओतिये फाइदो।
(ख) निम्नलिखित मुहावरों / लोकोक्तियों के लिए हिंदी मुहावरे / लोकोक्तियाँ लिखिए :
1. दूहों दुखाइणु 6. सीनो साहिजु
2. दिल सां लगणु 7. अखी देखाणु
3. दादु डियणु 8. डंद डियणु
4. रुक जा चणा चबणु 9. साहु छडणु
5. लकु लंघणु 10. हिक लठि सां हकिलणु
6. निम्नलिखित अनुच्छेदों का हिंदी में अनुवाद कीजिए :
(क) कंवर वटि सदाई लूलनि लंगिड़नि, पिंगुलनि, अंधनि, मंडनि जो अटालो रहदो हो, जिनि जो पालण पोषणु पंहिंजे हड़ां-बड़ां कंदो हो। हिक दफे, कंभलीमा जे गोठ में अमृत वेले भजनु करण लाइ संगति में आयो ऐं ख्यालु होसि त मंझंदि ताई कीर्तनु चालू रखंदो। वक़्तु वियो गुज़िरंदो ऐं मेलो वियो मचंदो। माण्डू मौज सां शब्द वर्षा जो रसु पी रहिया हुआ, त हिक शेवाधारीअ चयुसि, 'साई तव्हां जे टोलीअ में हिकु सूरदासु आहे। चवे थो त जेसी तव्हीं तेल मेट सां न विहिंजारींदा, तेसीं हू पाण अनु जलु न वर्ताईंदो।' इन ते कंवर चयुसि, 'हाजुरु, कीर्तनु पूरो करे अची थो सनानु करायांसि ।' पूरे बारहें बजे मजलिस बरखास्तु थी ऐं कंवरु मोटी आयो सूरदास वटि। पोइ यकदमि छेर जामो लाहे, मेटु मले ऐं उनमें तेलु विझी, सूरदास जे बुत जी खूबु मालिश कई ऐं महिट चहिट करे उनखे अछो उजिरो कयाई अहिड़ो हो कंवरु जंहिं जहिड़ो किरोड़नि में को मुश्किलु लभे!
(ख) मुहं ते खुशामद करण मां घणियूं खराबियूं थियूं जागनि। हिकिडो त खुशामद कंदडु अंदिरीं बाहिरी करणु सिखंदो, जंहिं लाइ शाइर चयो आहे; चे 'बाहिरां ज़ेबु ज़िबान में, दिलि में हचारों बियो त जंहिंजी खुशामद थींदी सो दुनियां पाणियूं वियो। मंझिसि जेके अवगुण ऐं बदि ख़सिलतूं हूंदियूं, से छडणु त छडण जे मागि, उटिलो उन्हनि में वेंदो पको थींदो तारीख मां केतिरा मिसाल मिलनि था त हाकिम जुल्मी या बदिकार हूंदा हुआ ऐं सलाहकार ऐं वज़ीर मिलंदा हुअनि लिली चिपी कंदड़, त मुल्क में अंधेरु बरी वेंदो हो, दुनिया में सचु चईं डींदड़ थोरा लभंदा।
खुशामद जी गिला करण मां इहो मतिलबु न आहे त कहिं शख्स में चडा गुण ऐं खसिलतू हुजनि, त संदसि दिलि वठण ऐं खेसि हिमिथाइण लाइ, संदसि साराह न कजे, साराह करण त वाजिबु आहे, पर तजवीज़ सां, जीअं मंझिसि हठु न जागे ऐं आफिरिजी न वजे। बियो त घणा माइट बार खे चतुराईअ जो को जवाबु डींदा, या अकुल जी गाल्हि कंदे बधंदा आहिनि, त बियनि जे रूबरू संदसि मुंहं ते खेसि साराहींदा आहिनी। इन्हीअ करे बारनि में नंढे ई हठ ऐं अभिमान जो बिजु थो पवे।
7.निम्नलिखित अनुच्छेद का सिंधी में अनुवाद कीजिए:
भारतवर्ष में वेदों के लिए आज भी स्थान है। प्राचीनकाल में तो वेदों की शिक्षा ही सर्वेसर्वा समझी जाती रही थी। कालांतर में वेदार्थ भी अति-दुर्जेय हो गया था। समाधिस्थ पुरुष जिस भाँति ब्रह्म दर्शन का आनंद लाभ प्राप्त कर सकता था, उसी भाँति समाधियुक्त अंतःकरण द्वारा ही शब्द ब्रह्म रूपी वेद का सही अर्थ समझ में आ सकता था। वेद अलौकिक ज्ञान भंडार के आधार हैं, जिनमें ज्ञान और विज्ञान भरा-पूरा है। मंत्रद्रष्टा ऋषियों (Research Scholars) उन्हें समाधि अवस्था में देखा है। लौकिक उपायों से वेद को समझने के लिए कालांतर में विद्वानों ने ग्रंथ रच डाले। वे हैं वेदांग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष)। तदनंतर वेदोपांग (दर्शनशास्त्र) भी सामने आए। इतने पर भी वेदों की गूढ़ता बनी ही रही, तब पुराण और इतिहासों ने इन्हें और अधिक लौकिक, आध्यात्मिक एवं आलंकारिक भाषा में सुगम करने का उपाय जनता के सम्मुख रखा। अतः वेदार्थ का वास्तविक रहस्य जानने के पूर्व इन षडंग (षट्शास्त्र) को जानना अति आवश्यक है। इनके साथ ही वेदोपांग से भी पूर्ण परिचित होना भी आवश्यक है।
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